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वैदिक ज्योतिष / 27 नक्षत्र महाविज्ञान
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वैदिक ज्योतिष मॉड्यूल: 27 नक्षत्र महाविज्ञान

अध्याय 4.27: रेवती नक्षत्र (Revati Nakshatra) विस्तृत परिचय, पौराणिक कथाएं, 4 चरण नवमांश, 9 नवग्रह प्रभाव व सात्विक उपाय

रेवती नक्षत्र का अति-विस्तृत परिचय, पूषन् देव व बलराम-रेवती विवाह की पौराणिक महागाथा, ब्रह्मा गण्डान्त, बुद्ध स्वामित्‍व, 4 चरण नवमांश व 9 नवग्रह फल।

भचक्र का अंतिम व सप्तविंशति नक्षत्र रेवती (Revati - परम समृद्धि, पूषन् देव, जुड़वां मछलियां, शुक्र उच्चत्व एवं ब्रह्मा गण्डान्त मोक्ष नक्षत्र) का विस्तृत खगोलीय व पौराणिक स्वरूप, 12 आदित्यों में से पूषन् देव (पथिकों के रक्षक) की पावन महागाथा, राजकुमारी रेवती व भगवान बलराम के पौराणिक विवाह की कथा, जुड़वां मछलियां (Pair of Fishes) प्रतीक की अलौकिक सात्विक ऊर्जा, रेवती-अश्विनी 'ब्रह्मा गण्डान्त' (Brahma Gandanta) का मोक्ष रहस्य, बुद्ध देव का स्वामित्‍व, मीन राशि (16° 40' से 30° 00') विस्तार, 4 पद नवमांश विभाजन (मीन चतुर्थ चरण में मीन वर्गोत्तम व 27° पर परम उच्च शुक्र), 9 नवग्रहों का रेवती नक्षत्र में विस्तृत फलित एवं सात्विक उपाय
📜 मेंटर Vikraant का आत्मीय मार्गदर्शन (Guru's Keynote)

प्रिय शिष्य! वैदिक ज्योतिष में 360 अंश के संपूर्ण आकाशमंडल का अंतिम व सप्तविंशति नक्षत्र 'रेवती' (Revati) है। मीन राशि में 16° 40' से 30° 00' तक फैला यह नक्षत्र 'पूषन् देव' (12 आदित्यों में से पथिकों व पशुओं के रक्षक सूर्य), राजा ककुद्मी की पुत्री राजकुमारी 'रेवती' व भगवान बलराम के विवाह की अलौकिक गाथा, जुड़वां मछलियां (Pair of Fishes) प्रतीक की असीम स्वतंत्रता, रेवती-अश्विनी 'ब्रह्मा गण्डान्त' (Brahma Gandanta) का मोक्ष द्वार, और व्यापार व बुद्धि के कारक 'बुध देव' के महा-कल्याणकारी संरक्षण का साक्षात प्रतीक है। महर्षि पराशर के अनुसार, रेवती नक्षत्र के स्वामी बुद्धि, व्यापार, कला, वाणी और संचार के कारक 'बुध देव' हैं और इसके अधिष्ठात्री देवता 12 आदित्यों में से यात्रियों के रक्षक साक्षात 'पूषन् देव' (Pushan) हैं। इसी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में 27° पर शुक्र देव परम उच्च (Exalted Venus) होते हैं। यह नक्षत्र जातक को अंतर्राष्ट्रीय स्तर का उद्योगपति, संगीत कला सम्राट, परोपकारी दानवीर, और मोक्षगामी संत बनाता है।

"पूषा अधिपा यस्य बुधः (सौम्यः) स्वामी महाबलः।
मीनांशे संस्थितो मृदुः अति-समृद्धि कर्मकारकः॥
मत्स्यरूपो देवगणो अन्त्यनाड़ी धर्मसाधकः।
शुक्रौच्चप्रदो धनी सर्वसिद्धि प्रदायकः॥"


(भावार्थ: पूषन् देव जिनके अधिष्ठात्री देवता हैं, महाबली बुध देव जिनके स्वामी हैं, जो मीन राशि के अंतिम भाग में स्थित, मृदु स्वभाव वाले और अति-समृद्धि कर्म करने वाले हैं, वे रेवती नक्षत्र हैं। जलमग्न मत्स्य प्रतीक, देव गण, अन्त्य नाड़ी से युक्त यह नक्षत्र शुक्र का उच्चत्व व असीम धन प्रदान कर सर्वसिद्धि देता है।)

💡 1. परिचय (Introduction & Utility of Revati Nakshatra)

  • भचक्र का सप्तविंशति द्वार एवं बुध का महा-स्वामित्‍व: रेवती (Revati) संपूर्ण भचक्र का अंतिम व सप्तविंशति नक्षत्र (16° 40' से 30° 00' मीन राशि) है, जिसके स्वामी बुद्धि, व्यापार, कला, वाक्-पटुता, और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के कारक 'बुध देव' हैं। यह नक्षत्र समृद्धि और मोक्ष यात्रा का मूलाधार है।
  • पूषन् देव (12 आदित्य) अधिष्ठाता एवं मृदु/कल्याणकारी स्वभाव: इस नक्षत्र के देवता 12 आदित्यों में से एक पथिकों व पशुओं के रक्षक 'पूषन् देव' (Pushan) हैं। इसका स्वभाव 'मृदु व कल्याणकारी' (Soft & Nourishing) है; इसमें भटकते हुए जीवों को सही दिशा दिखाने और समृद्धि प्रदान करने की चमत्कारिक शक्ति होती है।
  • जुड़वां मछलियां (Pair of Fishes) प्रतीक व शुक्र का परम उच्चत्व: रेवती का मुख्य प्रतीक 'जल में तैरती जुड़वां मछलियां' (Twin Fishes) है। यह प्रतीक सांसारिक भवसागर को सुगमता से पार करने का द्योतक है। इसी नक्षत्र में 27° पर 'शुक्र देव' परम उच्च होते हैं जो अलौकिक कला व धन देते हैं।
  • रेवती-अश्विनी 'ब्रह्मा गण्डान्त' (Brahma Gandanta) का रहस्य: रेवती नक्षत्र के अंतिम 3° 20' (26° 40' से 30° 00' मीन) में जल तत्व की समाप्ति व अग्नि तत्व का आरंभ 'ब्रह्मा गण्डान्त' कहलाता है, जो आत्मा के पुनर्जन्म चक्र की समाप्ति व परम मोक्ष का प्रतीक है।
  • 4 चरण नवमांश विभाजन (4 Padas Analysis): रेवती के 4 चरण क्रमशः धनु (गुरु), मकर (शनि), कुंभ (शनि) और मीन (गुरु - मीन वर्गोत्तम व 27° उच्च शुक्र!) में विभाजित हैं, जो जातक को दार्शनिक गुरु, अंतर्राष्ट्रीय व्यापारी, मानवतावादी शोधकर्ता व मोक्ष संत पद देते हैं।
  • शारीरिक अंग व कालपुरुष पैर-अंगूठे: कालपुरुष के शरीर में रेवती नक्षत्र पैरों के अंगूठे (Toes), पैर (Feet), टखने, और लसीका प्रणाली (Lymphatic system) का स्वामी है।
  • देव गण, अन्त्य नाड़ी व गज (हाथी) योनि का प्रभाव: रेवती नक्षत्र देव गण, अन्त्य नाड़ी और गज (हाथी) योनि से सम्बद्ध है; यह अंतर्राष्ट्रीय उद्योगपतियों, बैंक संस्थापकों, संगीत निर्देशकों, कवियों, पशु चिकित्सकों, जहाज के कप्तानों, और मोक्षगामी योगियों का नेतृत्व करता है।
  • सात्विक परिहार एवं ऊर्जा संतुलन: रेवती नक्षत्र के जातकों को अत्यधिक भावुकता, दूसरों पर अंधविश्वास, और गण्डान्त दोष के प्रभाव से बचने हेतु पूषन् देव व भगवान विष्णु की उपासना, 'विष्णु सहस्रनाम' पाठ, तथा पन्ना (Emerald) धारण करना अत्यंत फलदायी होता है।

📖 2. रेवती नक्षत्र का पौराणिक, खगोलीय एवं आध्यात्मिक स्वरूप (Puranic & Astronomical Attributes)

2.1 पूषन् देव की पौराणिक महागाथा एवं 'पथिकों व पशुओं का संरक्षण'

ऋग्वेद और विष्णु पुराण के अनुसार, 12 आदित्यों में से 'पूषन् देव' संपूर्ण सृष्टि के यात्रियों, पशु-पक्षियों, और भटके हुए जीवों के रक्षक हैं। पूषन् देव के पास बिना दांतों वाला पावन स्वरूप है, वे केवल पिघला हुआ अन्न या खीर ग्रहण करते हैं।

पूषन् देव मार्ग के पत्थरों और कंटकों को दूर करके यात्रियों की यात्रा सुरक्षित बनाते हैं। रेवती नक्षत्र जीवन यात्रा में किसी भी विघ्न को दूर करके जातक को सुरक्षित गंतव्य और असीम धन-संपदा प्रदान करता है।

2.2 राजकुमारी 'रेवती' एवं भगवान बलराम के पौराणिक विवाह की महागाथा

श्रीमद्भागवत पुराण (स्कन्ध 9) के अनुसार, राजा ककुद्मी की अत्यंत सुंदर और गुणवती पुत्री का नाम 'रेवती' था। राजा अपनी पुत्री हेतु सुयोग्य वर खोजने ब्रह्मा जी के पास ब्रह्मलोक गए।

वहाँ गंधर्व संगीत सुनने में समय बीता। जब ब्रह्मा जी ने बताया कि पृथ्वी पर लाखों वर्ष बीत चुके हैं और द्वापर युग आ चुका है, तो राजा चिंतित हुए। ब्रह्मा जी ने कहा—"हे राजन! पृथ्वी पर इस समय शेषनाग के अवतार 'भगवान बलराम' प्रकट हुए हैं, आप अपनी पुत्री रेवती का विवाह उनसे करें।" राजा ने आकर राजकुमारी रेवती का विवाह भगवान बलराम से कराया। यह कथा रेवती नक्षत्र के दिव्य राजसी वैभव और उच्च संबंध का प्रमाण है।

2.3 'जुड़वां मछलियां' (Pair of Fishes) प्रतीक एवं शुक्र का 27° परम उच्चत्व

रेवती नक्षत्र का मुख्य प्रतीक 'जल में तैरती जुड़वां मछलियां' (Twin Fishes) है। जिस प्रकार मछली जल में बिना किसी बाधा के स्वच्छंद तैरती है, उसी प्रकार रेवती का जातक सांसारिक दुखों के सागर में भी आनंदित रहता है।

इसी रेवती नक्षत्र में 27° पर कला, प्रेम, संगीत और सौंदर्य के कारक 'शुक्र देव' अपने परम उच्चत्व (Exalted Venus) को प्राप्त करते हैं, जो जातक को विश्वप्रसिद्ध कलाकार व अरबपति बनाता है।

2.4 रेवती-अश्विनी 'ब्रह्मा गण्डान्त' (Brahma Gandanta) का मोक्ष रहस्य

भचक्र के अंतिम बिंदु 360° (26° 40' से 30° 00' मीन राशि) पर रेवती नक्षत्र स्थित है, जहाँ जल तत्व समाप्त होकर मेष राशि का अग्नि तत्व (अश्विनी) आरंभ होता है। इसे 'ब्रह्मा गण्डान्त' (Brahma Gandanta) कहा जाता है।

यह गण्डान्त बिंदु जातक के अहंकार और पूर्वजन्मों के संचित कर्मों को भस्म करके आत्मा को साक्षात परमात्मा के परम धाम (मोक्ष) में विलीन कर देता है।

2.5 प्रथम चरण (16° 40' - 20° 00' मीन): धनु नवमांश, गुरु का ज्ञान व दार्शनिक गुरु

रेवती नक्षत्र का प्रथम चरण मीन राशि (16° 40' से 20° 00') धनु नवमांश में पड़ता है, जिसके स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं। धनु एक द्विस्वभाव अग्नि तत्व राशि है। यह चरण जातक को अगाध वेद ज्ञान, दार्शनिक शिक्षक, परोपकारी यात्री, और धार्मिक संस्थाओं का प्रमुख बनाता है।

2.6 द्वितीय चरण (20° 00' - 23° 20' मीन): मकर नवमांश, शनि का अनुशासन व अंतर्राष्ट्रीय उद्योगपति

रेवती नक्षत्र का द्वितीय चरण मीन राशि (20° 00' से 23° 20') मकर नवमांश में पड़ता है, जिसके स्वामी कर्मफलदाता शनि देव हैं। मकर एक चर पृथ्वी तत्व राशि है। यह चरण जातक को कठोर व्यावहारिक अनुशासन, अंतर्राष्ट्रीय व्यापारपति, बैंक निदेशक, और जहाजरानी (Shipping) सम्राट बनाता है।

2.7 तृतीय चरण (23° 20' - 26° 40' मीन): कुंभ नवमांश, शनि की वैज्ञानिक सोच व मानवतावादी सेवा

रेवती नक्षत्र का तृतीय चरण मीन राशि (23° 20' से 26° 40') कुंभ नवमांश में पड़ता है, जिसके स्वामी कर्मफलदाता शनि देव हैं। यह चरण जातक को वैज्ञानिक दृष्टिकोण, गुप्त शोध क्षमता, मानवतावादी समाज सेवा, और वैश्विक परोपकार की ओर प्रेरित करता है।

2.8 चतुर्थ चरण (26° 40' - 30° 00' मीन): मीन नवमांश, गुरु का 'मीन वर्गोत्तम', 27° उच्च शुक्र व ब्रह्मा गण्डान्त

रेवती नक्षत्र का चतुर्थ चरण मीन राशि (26° 40' से 30° 00') मीन नवमांश में पड़ता है, जिसके स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं। यह 'मीन वर्गोत्तम' (Vargottama), 27° पर 'परम उच्च शुक्र' (Exalted Venus) एवं 'ब्रह्मा गण्डान्त' (Brahma Gandanta) का मोक्ष बिंदु है! यह चरण जातक को साक्षात कला सम्राट, असीम ऐश्वर्यवान, और परम मोक्ष का अधिकारी संत बनाता है।

📊 3. रेवती नक्षत्र के मूल खगोलीय एवं पौराणिक मापदंडों की महा-मास्टर तालिका

गुण व मापदंड (Attribute) ज्योतिषीय मान व पौराणिक विवरण (Astrological & Puranic Details)
भचक्र क्रम व विस्तार (Zodiac Range)सप्तविंशति नक्षत्र (16° 40' से 30° 00' मीन राशि तक)
स्वामी ग्रह (Ruling Planet)बुध देव (Mercury / सौम्य / बुद्धि, वाणी व व्यापार)
अधिष्ठात्री देवता (Deity)पूषन् देव (Pushan / 12 आदित्यों में से एक / पथिक रक्षक)
प्रतीक चिह्न (Symbol)जलमग्न जुड़वां मछलियां / मृदंग (Pair of Fishes / Drum)
गण व नाड़ी (Gana & Nadi)देव गण (Deva Gana) / अन्त्य नाड़ी (Antya Nadi)
योनि व तत्व (Yoni & Tattva)गज योनि (Elephant / हाथी) / जल तत्व
नक्षत्र स्वभाव (Quality)मृदु व कल्याणकारी (Soft & Nourishing)
सम्बद्ध राशि (Primary Sign)मीन राशि (Pisces / राशि स्वामी गुरु)
दिशा व स्थिति (Direction)उत्तर दिशा (North) / तिर्यकमध्य नक्षत्र
शरीर के अंग (Body Signification)पैर, अंगूठे, टखने व लसीका प्रणाली

🔥 4. रेवती नक्षत्र के विविध नाम एवं symbolic गुणधर्म तालिका

सं. व नाम मूल संस्कृत अर्थ आध्यात्मिक व खगोलीय गुणधर्म ज्योतिषीय प्रभाव व फलित
1. रेवती (Revati)अत्यंत समृद्ध, धनवती राजकुमारीअखंड ऐश्वर्य व मोक्ष यात्राअंतर्राष्ट्रीय उद्योगपति व संत
2. पौष्णा (Paushna)पूषन् देव का अपना पावन क्षेत्रपथिकों व पशुओं का रक्षणसुरक्षिता, व्यापार व दयालुता
3. मत्स्या (Matsya)जलमग्न जुड़वां मछलियांसांसारिक दुखों से मुक्तिजल यात्रा, शिपिंग व संगीत
4. गण्डान्ता (Gandanta)मीन-मेष ब्रह्मा गण्डान्तजन्म-मरण चक्र का समापनसाक्षात मोक्ष व परम समाधि
5. सौम्या (Saumya)बुध देव का अपना नक्षत्रतीक्ष्ण बुद्धि व वाक्-पटुतामहान लेखक, CA व वक्ता
6. भार्गवोच्चा (Bhargavochha)शुक्र देव के परम उच्चत्व का धाम27° पर उच्च शुक्र का ऐश्वर्यविश्वप्रसिद्ध कला सम्राट

✨ 5. रेवती नक्षत्र में 4 चरण नवमांश विभाजन तालिका (4 Padas Table)

नक्षत्र चरण (Pada) विस्तार अंश (Degree Range) नवमांश राशि (Navamsha) नवमांश स्वामी फलित गुणधर्म व स्वभाव
प्रथम चरण (Pada 1)16° 40' - 20° 00'धनु नवमांश (Sagittarius)गुरु (Jupiter)दार्शनिक गुरु, वेदपाठी।
द्वितीय चरण (Pada 2)20° 00' - 23° 20'मकर नवमांश (Capricorn)शनि (Saturn)अंतर्राष्ट्रीय व्यापारी, बैंकर।
तृतीय चरण (Pada 3)23° 20' - 26° 40'कुंभ नवमांश (Aquarius)शनि (Saturn)वैज्ञानिक सोच, मानवतावादी सेवी।
चतुर्थ चरण (Pada 4)26° 40' - 30° 00'मीन नवमांश (Pisces)गुरु (Jupiter)मीन वर्गोत्तम! 27° उच्च शुक्र! गण्डान्त!

♉ 6. रेवती नक्षत्र में 9 नवग्रहों का विस्तृत फलित तालिका चार्ट (9 Planets in Revati Table)

ग्रह स्थिति (Planet in Revati) ज्योतिषीय स्थिति व सम्बद्धता फलित प्रभाव व व्यक्तित्व (Personality Traits) करियर व राजयोग (Career & Success) सावधानियां व सात्विक परिहार
1. सूर्य (Sun) in रेवती मित्र राशि / प्रतापी व्यापारी तेजस्वी स्वाभिमान, परोपकारी। विदेश व्यापार प्रमुख, IAS। अहम् से बचें; सूर्य अर्घ्य।
2. चंद्रमा (Moon) in रेवती जन्म नक्षत्र / अति-मृदु मन दयालु, संगीतप्रेमी, समृद्ध। प्रसिद्ध कला सम्राट, कवि, बैंकर। अत्यधिक भावुकता से बचें; शिव पूजन।
3. मंगल (Mars) in रेवती मित्र राशि / धीर रक्षक शांत योद्धा, दयालु रक्षक। शिपिंग प्रमुख, सर्जन, बिल्डर। आवेग से बचें; हनुमान पूजा।
4. बुध (Mercury) in रेवती मीन में नीच (Debilitated भाग) तीक्ष्ण दार्शनिक बुद्धि, वक्ता। अंतर्राष्ट्रीय व्यापारी, लेखक, CA। अति-संदेह से बचें; दुर्गा पूजा।
5. गुरु (Jupiter) in रेवती स्वराशि (Own Sign - मीन) महा-ज्ञान मोक्ष राजयोग! चीफ जस्टिस, कुलपति, शंकराचार्य। ज्ञान के अहम् से बचें; पुखराज।
6. शुक्र (Venus) in रेवती मीन में परम उच्च (27° Exalted)! महा-कला ऐश्वर्य राजयोग! कला सम्राट, फिल्म निर्माता, स्टार। अति-विलासिता से बचें; श्रीसूक्त पाठ।
7. शनि (Saturn) in रेवती मित्र राशि / धीर संयमी कर्मठ, निष्काम सेवी, धीर। माइनिंग प्रमुख, न्यायाधीश, साधक। आलस्य से बचें; तेल दान।
8. राहु (Rahu) in रेवती मित्र राशि / अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कूटनीतिक बुद्धि, AI तकनीक। अंतर्राष्ट्रीय व्यापारी, AI शोधकर्ता। छल-कपट से बचें; सप्तधान्य दान।
9. केतु (Ketu) in रेवती मित्र राशि / ब्रह्मा गण्डान्त मोक्ष अगाध मोक्ष साधना, वैराग्य। परमहंस संत, योग आचार्य, हीलर। अति-उदासीनता से बचें; गणेश पूजन।
12 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 बुध शुक्र 27°
📊 चित्र 1: रेवती नक्षत्र भचक्र स्थिति एवं शुक्र उच्चत्व कुण्डली (मीन राशि 16° 40' से 30° 00' | शुक्र 27° पर परम उच्च = मालव्य महापुरुष राजयोग | पूषन् देवता | ब्रह्मा गण्डान्त)

🐟 रेवती नक्षत्र: पूषन् देव, जुड़वां मछलियां एवं शुक्र का मालव्य राजयोग

  • भचक्र की पूर्णता (27th Nakshatra): रेवती नक्षत्र 360° भचक्र का अंतिम 27वां नक्षत्र है। यहाँ जल राशि मीन (30° 00') से अग्नि राशि मेष (00° 00') का महा-संधिकाल साक्षात ब्रह्मा गण्डान्त कहलाता है, जो संपूर्ण कर्म-बंधन समाप्त कर परम मोक्ष प्रदान करता है।
  • शुक्र का परम उच्चत्व (27° Pisces): रेवती के चतुर्थ चरण (मीन नवमांश में वर्गोत्तम) में 27° पर दैत्यगुरु शुक्र देव साक्षात अपने परम उच्चत्व को प्राप्त कर मालव्य महापुरुष राजयोग बनाते हैं, जिससे जातक को असीम समृद्धि, सौन्दर्य, कला-निपुणता और आध्यात्मिक ऐश्वर्य मिलता है।
  • पूषन् देव व जुड़वां मछलियां (Mina Yugala): इसके देवता पूषन् (सुरक्षित यात्रा व दिशाओं के संरक्षक) हैं। जुड़वां मछलियां प्रतीक सांसारिक भवसागर को सुगमता से तैरकर पार करने और मोक्ष प्राप्त करने का साक्षात प्रतीक हैं।

📝 7. मुख्य बिंदु सार-संक्षेप (Chapter Summary)

  • 1. भचक्र का अंतिम सप्तविंशति नक्षत्र: रेवती नक्षत्र मीन राशि के 16° 40' से 30° 00' तक फैला भचक्र का अंतिम नक्षत्र व मोक्ष का परम धाम है।
  • 2. पूषन् देव व बलराम-रेवती विवाह: इसके देवता पूषन् देव (पथिक रक्षक) हैं तथा राजकुमारी रेवती व भगवान बलराम के पौराणिक विवाह की कथा इससे सम्बद्ध है।
  • 3. जुड़वां मछलियां प्रतीक व 27° उच्च शुक्र: जुड़वां मछलियां प्रतीक सांसारिक भवसागर पार करने का द्योतक है तथा इसमें 27° पर शुक्र परम उच्च होते हैं।
  • 4. रेवती-अश्विनी ब्रह्मा गण्डान्त: इसके चतुर्थ चरण में 26° 40' से 30° 00' तक ब्रह्मा गण्डान्त स्थित है जो जन्म-मरण चक्र समाप्त कर साक्षात मोक्ष देता है।
  • 5. सात्विक परिहार: गण्डान्त शांति हेतु 'विष्णु सहस्रनाम' पाठ, पूषन् देव आराधना, तथा सबसे छोटी उंगली में सोने या चांदी में 5 से 7 रत्ती का शुद्ध पन्ना (Emerald) धारण करना शुभ रहता है।

❓ 8. बहुप्रचलित प्रश्नोत्तरी (SEO FAQs)

प्रश्न 1: 12 आदित्यों में से 'पूषन् देव' और 'राजकुमारी रेवती व बलराम विवाह' की कथा का रेवती नक्षत्र से क्या संबंध है?
उत्तर: पौराणिक ग्रंथों के अनुसार पूषन् देव संपूर्ण ब्रह्मांड के यात्रियों, पशुओं और भटके जीवों के रक्षक हैं। राजा ककुद्मी की पुत्री राजकुमारी रेवती का विवाह भगवान ब्रह्मा के आदेश पर भगवान बलराम (शेषनाग अवतार) से संपन्न हुआ था। इसी कारण रेवती नक्षत्र में जन्मे जातक को संपूर्ण जीवन में परम सुरक्षा, राजसी ऐश्वर्य, और समृद्ध संबंध प्राप्त होते हैं।
प्रश्न 2: रेवती-अश्विनी 'ब्रह्मा गण्डान्त' (Brahma Gandanta) और शुक्र के 27° परम उच्चत्व का जातक के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर: रेवती नक्षत्र के 27° पर शुक्र देव परम उच्च (Exalted Venus) होकर जातक को अलौकिक कला, सौंदर्य और अरबपति ऐश्वर्य प्रदान करते हैं। वहीं रेवती के अंतिम चरण में स्थित 'ब्रह्मा गण्डान्त' जातक के भौतिक अहंकार को मिटाकर आत्मा को साक्षात परमात्मा में लीन (मोक्ष) कर देता है।
प्रश्न 3: रेवती नक्षत्र के जातकों के लिए सबसे अचूक सात्विक उपाय क्या हैं?
उत्तर: रेवती नक्षत्र के स्वामी बुध देव और देवता पूषन् आदित्य हैं। इनके दोष शमन व गण्डान्त शांति हेतु प्रतिदिन भगवान विष्णु के 'विष्णु सहस्रनाम' का पाठ करना, गायों को हरा चारा व गुड़ खिलाना, बुद्धाय नमः मंत्र का जाप करना, और कनिष्ठिका (सबसे छोटी उंगली) में सोने या चांदी में 5 से 7 रत्ती का शुद्ध जाम्बियन पन्ना (Emerald) धारण करना परम लाभदायक है।
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