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वैदिक ज्योतिष / 27 नक्षत्र महाविज्ञान
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वैदिक ज्योतिष मॉड्यूल: 27 नक्षत्र महाविज्ञान

अध्याय 4.23: धनिष्ठा नक्षत्र (Dhanishtha Nakshatra) विस्तृत परिचय, पौराणिक कथाएं, 4 चरण नवमांश, 9 नवग्रह प्रभाव व सात्विक उपाय

धनिष्ठा नक्षत्र का अति-विस्तृत परिचय, अष्ट वसु (भीष्म पितामह) व शिव डमरू नाद की पौराणिक महागाथा, मंगल स्वामित्‍व, 4 चरण नवमांश व 9 नवग्रह फल।

भचक्र का त्रयोविंशति नक्षत्र धनिष्ठा (Dhanishtha - अखंड धन-ऐश्वर्य, अष्ट वसु, शिव डमरू नाद एवं संगीत नक्षत्र) का विस्तृत खगोलीय व पौराणिक स्वरूप, अष्ट वसुओं की पावन महागाथा, गंगापुत्र भीष्म पितामह के प्रादुर्भाव की कथा, भगवान शिव के डमरू (Damaru) व बांसुरी प्रतीक की अलौकिक नाद-ब्रह्म ऊर्जा, मंगल देव का स्वामित्‍व, मकर-कुंभ (23° 20' मकर से 06° 40' कुंभ) विस्तार, 4 पद नवमांश विभाजन (मकर में उच्च मंगल राजयोग), 9 नवग्रहों का धनिष्ठा नक्षत्र में विस्तृत फलित एवं सात्विक उपाय
📜 मेंटर Vikraant का आत्मीय मार्गदर्शन (Guru's Keynote)

प्रिय शिष्य! वैदिक ज्योतिष में 360 अंश के संपूर्ण आकाशमंडल का त्रयोविंशति नक्षत्र 'धनिष्ठा' (Dhanishtha) है। मकर राशि के 23° 20' से कुंभ राशि के 06° 40' तक फैला यह नक्षत्र 'अति-धनी' (Most Wealthy & Famous), अष्ट वसुओं (आठ समृद्ध देवगण) का अखंड ऐश्वर्य, गंगापुत्र भीष्म पितामह की भीष्म प्रतिज्ञा व अपराजित पराक्रम, भगवान शिव के डमरू (Damaru) से प्रकट ब्रह्मांडीय नाद-ब्रह्म, और भूमिपुत्र 'मंगल देव' के प्रचंड राजसी तपोबल का साक्षात प्रतीक है। महर्षि पराशर के अनुसार, धनिष्ठा नक्षत्र के स्वामी ऊर्जा, पराक्रम, भूमि और साहस के कारक 'मंगल देव' हैं और इसके अधिष्ठात्री देवता समृद्ध प्रकृति के 8 देवगण साक्षात 'अष्ट वसु' (Ashta Vasus) हैं। यह नक्षत्र जातक को अरबपति रीयल एस्टेट सम्राट, विश्वप्रसिद्ध संगीतकार और अखंड धन-संपदा का स्वामी बनाता है।

"वसवो अधिपा यस्य भौमः (कुजः) स्वामी महाबलः।
मकर-कुंभ संस्थितो उग्रो अति-धनपति कर्मकारकः॥
मृदङ्गरूपो राक्षसगणो मध्यनाड़ी धर्मसाधकः।
अखंडधनप्रदो श्रीमान् सर्वसिद्धि प्रदायकः॥"


(भावार्थ: अष्ट वसु जिनके अधिष्ठात्री देवता हैं, महाबली मंगल देव जिनके स्वामी हैं, जो मकर व कुंभ राशि की संधि पर स्थित, उग्र स्वभाव वाले और अति-धनपति कर्म करने वाले हैं, वे धनिष्ठा नक्षत्र हैं। डमरू व मृदंग प्रतीक, राक्षस गण, मध्य नाड़ी से युक्त यह नक्षत्र अखंड धन व श्री (लक्ष्मी) प्रदान कर सर्वसिद्धि देता है।)

💡 1. परिचय (Introduction & Utility of Dhanishtha Nakshatra)

  • भचक्र का त्रयोविंशति द्वार एवं मंगल का महा-स्वामित्‍व: धनिष्ठा (Dhanishtha) संपूर्ण भचक्र का त्रयोविंशति नक्षत्र (23° 20' मकर से 06° 40' कुंभ राशि) है, जिसके स्वामी ऊर्जा, पराक्रम, भूमि, भवन, निर्माण और वाद्ययंत्रों के कारक 'मंगल देव' हैं। यह नक्षत्र धन-संपदा और संगीत का मूलाधार है।
  • अष्ट वसु अधिष्ठाता एवं उग्र/चर स्वभाव: इस नक्षत्र के देवता 8 ब्रह्मांडीय ऐश्वर्य देव 'अष्ट वसु' (ध्रुव, धर, सोम, आप, अनिल, अनल, प्रत्यूष, प्रभास) हैं। इसका स्वभाव 'उग्र व संगीतमय' (Fierce & Musical) है; इसमें शून्य से उठकर विशाल संपत्ति का साम्राज्य खड़ा करने की शक्ति होती है।
  • शिव डमरू व बांसुरी (Drum/Flute) प्रतीक का रहस्य: धनिष्ठा का मुख्य प्रतीक भगवान शिव का 'डमरू' (Damaru) अथवा 'बांसुरी/ढोलक' है। डमरू ब्रह्मांडीय नाद-ब्रह्म का जनक है, जो संगीत, नृत्य, ताल, लय और ध्वन्यात्मक तरंगों का प्रतिनिधित्व करता है।
  • 4 चरण नवमांश विभाजन (4 Padas Analysis): धनिष्ठा के 4 चरण क्रमशः सिंह (सूर्य), कन्या (बुध - मकर में परम उच्च मंगल व पुष्कर!), तुला (शुक्र) और वृश्चिक (मंगल - स्वगृही!) नवमांश में विभाजित हैं, जो जातक को रीयल एस्टेट किंग, संगीतकार, लक्जरी बिल्डर व निडर योद्धा बनाते हैं।
  • शारीरिक अंग व कालपुरुष पीठ-टखने: कालपुरुष के शरीर में धनिष्ठा नक्षत्र पीठ (Back), टखने (Ankles), घुटने, पैरों की नली (Shin bones) और रक्त संचार प्रणाली का स्वामी है।
  • राक्षस गण, मध्य नाड़ी व सिंह (शेरनी) योनि का प्रभाव: धनिष्ठा नक्षत्र राक्षस गण, मध्य नाड़ी और सिंह (शेरनी) योनि से सम्बद्ध है; यह रीयल एस्टेट डेवलपर्स, संगीत निर्देशकों, कोरियोग्राफरों, एथलीटों, सैन्य अधिकारियों, वित्तीय योजनाकारों और बैंकरों का नेतृत्व करता है।
  • सात्विक परिहार एवं ऊर्जा संतुलन: धनिष्ठा नक्षत्र के जातकों को वैवाहिक जीवन में जिद्दीपन, अत्यधिक अहंकार, और संगीत/धन के घमंड से बचने हेतु अष्ट वसु व शिव जी की उपासना, 'शिव तांडव स्तोत्र' पाठ, तथा मूंगा (Red Coral) धारण करना अत्यंत फलदायी होता है।

📖 2. धनिष्ठा नक्षत्र का पौराणिक, खगोलीय एवं आध्यात्मिक स्वरूप (Puranic & Astronomical Attributes)

2.1 अष्ट वसुओं (8 Vasus) की पौराणिक महागाथा एवं 'धनिष्ठा' (अखंड धनी) का रहस्य

महाभारत (आदि पर्व) और विष्णु पुराण के अनुसार, 'अष्ट वसु' आठ समृद्ध ब्रह्मांडीय देवगण हैं—ध्रुव (स्थिरता), धर (पृथ्वी संतुलन), सोम (अमृत व जल), आप (पवित्रता), अनिल (वायु), अनल (अग्नि), प्रत्यूष (उषाकाल) और प्रभास (दिव्य प्रकाश)।

'धनिष्ठा' का शाब्दिक अर्थ ही 'अति-धनी, अत्यंत समृद्ध व तेजस्वी' (The Wealthiest) है। अष्ट वसुओं के आशीर्वाद से धनिष्ठा नक्षत्र के जातक के घर में कभी धन, अन्न, भवन और वाहनों की कमी नहीं होती। वह जहां भी कदम रखता है, वहां समृद्धि का साम्राज्य स्थापित हो जाता है।

2.2 भगवान शिव के 'डमरू' (Damaru) एवं नाद-ब्रह्म की अलौकिक महागाथा

धनिष्ठा नक्षत्र का मुख्य प्रतीक भगवान शिव का 'डमरू' (Damaru) है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सृष्टि के आरंभ में भगवान नटराज शिव ने तांडव नृत्य करते समय 14 बार डमरू बजाया था, जिससे 14 माहेश्वर सूत्र (संस्कृत वर्णमाला व व्याकरण) का जन्म हुआ था।

डमरू अंदर से खोखला होता है किंतु बजने पर अखंड गूंज पैदा करता है। धनिष्ठा नक्षत्र का जातक जब अपनी विद्या या कला का प्रदर्शन करता है, तो उसकी ख्याति चारों दिशाओं में डमरू की भांति गूंजती है।

2.3 गंगापुत्र 'भीष्म पितामह' के अवतार की पौराणिक महागाथा

महाभारत के अनुसार, अष्ट वसुओं में से अष्टम वसु 'प्रभास' ने महर्षि वशिष्ठ की नंदिनी गाय का हरण किया था, जिसके शापवश उन्हें पृथ्वी पर माता गंगा और शांतनु के पुत्र 'भीष्म पितामह' के रूप में जन्म लेना पड़ा।

धनिष्ठा नक्षत्र भीष्म पितामह जैसी 'अखंड भीष्म प्रतिज्ञा', अटूट अनुशासन, युद्धभूमि में अपराजित पराक्रम, और इच्छामृत्यु का तपोबल प्रदान करता है।

2.4 मंगल (स्वामी), अष्ट वसु (अधिष्ठाता), मकर-कुंभ (शनि) का महा-ऐश्वर्य राजयोग

नक्षत्र स्वामी मंगल (पराक्रम व भूमि), अधिष्ठाता अष्ट वसु (अखंड धन) और मकर राशि में उच्च मंगल (28° पर परम उच्च) का यह संगम जातक को रीयल एस्टेट का बादशाह, अरबपति उद्योगपति और विश्वप्रसिद्ध संगीत निर्देशक बनाता है।

2.5 प्रथम चरण (23° 20' - 26° 40' मकर): सिंह नवमांश, सूर्य का तेज व प्रतापी उद्योगपति

धनिष्ठा नक्षत्र का प्रथम चरण मकर राशि (23° 20' से 26° 40') सिंह नवमांश में पड़ता है, जिसके स्वामी सूर्य देव हैं। सिंह एक स्थिर अग्नि तत्व राशि है। यह चरण जातक को राजा जैसा प्रतापी स्वाभिमान, बड़े उद्योग स्थापित करने का साहस और अखंड धन-ऐश्वर्य प्रदान करता है।

2.6 द्वितीय चरण (26° 40' - 30° 00' मकर): कन्या नवमांश, बुध की वित्तीय बुद्धि, 'उच्च मंगल' व पुष्कर पद

धनिष्ठा नक्षत्र का द्वितीय चरण मकर राशि (26° 40' से 30° 00') कन्या नवमांश में पड़ता है, जिसके स्वामी बुध देव हैं। इसी चरण में मकर में मंगल परम उच्च (Exalted Mars at 28°) होता है एवं यह 'पुष्कर नवमांश' है! यह चरण जातक को रीयल एस्टेट का महा-सम्राट, सॉफ्टवेयर आर्किटेक्ट, और वित्तीय योजनाकार बनाता है।

2.7 तृतीय चरण (00° 00' - 03° 20' कुंभ): तुला नवमांश, शुक्र का ऐश्वर्य व संगीत सम्राट

धनिष्ठा नक्षत्र का तृतीय चरण कुंभ राशि (00° 00' से 03° 20') तुला नवमांश में पड़ता है, जिसके स्वामी शुक्र देव हैं। तुला एक चर वायु तत्व राशि है। यह चरण जातक को अलौकिक संगीत निर्देशन, वाद्ययंत्र वादन, कोरियोग्राफी, और फिल्म उद्योग में अपार प्रसिद्धि देता है।

2.8 चतुर्थ चरण (03° 20' - 06° 40' कुंभ): वृश्चिक नवमांश, मंगल का 'स्वगृही वृश्चिक' व निडर योद्धा

धनिष्ठा नक्षत्र का चतुर्थ चरण कुंभ राशि (03° 20' से 06° 40') वृश्चिक नवमांश में पड़ता है, जिसके स्वामी स्वयं मंगल देव हैं। यह 'स्वगृही वृश्चिक नवमांश' है! यह चरण जातक को सेनापति, एथलेटिक चैंपियन, मार्शल आर्ट्स एक्सपर्ट, और कठिनतम चुनौतियों पर विजय पाने का तपोबल देता है।

📊 3. धनिष्ठा नक्षत्र के मूल खगोलीय एवं पौराणिक मापदंडों की महा-मास्टर तालिका

गुण व मापदंड (Attribute) ज्योतिषीय मान व पौराणिक विवरण (Astrological & Puranic Details)
भचक्र क्रम व विस्तार (Zodiac Range)त्रयोविंशति नक्षत्र (23° 20' मकर से 06° 40' कुंभ राशि तक)
स्वामी ग्रह (Ruling Planet)मंगल देव (Mars / कुज / ऊर्जा, पराक्रम व भूमि कारक)
अधिष्ठात्री देवता (Deity)अष्ट वसु (Ashta Vasus / 8 ऐश्वर्य प्रकृति देवगण)
प्रतीक चिह्न (Symbol)भगवान शिव का डमरू / बांसुरी / मृदंग (Damaru / Flute)
गण व नाड़ी (Gana & Nadi)राक्षस गण (Rakshasa Gana) / मध्य नाड़ी (Madhya Nadi)
योनि व तत्व (Yoni & Tattva)सिंह योनि (Lioness / शेरनी) / पृथ्वी-वायु तत्व
नक्षत्र स्वभाव (Quality)उग्र व संगीतमय (Fierce & Musical)
सम्बद्ध राशि (Primary Sign)मकर (2 पद - शनि) व कुंभ राशि (2 पद - शनि)
दिशा व स्थिति (Direction)पूर्व दिशा (East) / तिर्यकमध्य नक्षत्र
शरीर के अंग (Body Signification)पीठ, टखने, घुटने, पैर की नली व रक्त संचार

🔥 4. धनिष्ठा नक्षत्र के विविध नाम एवं symbolic गुणधर्म तालिका

सं. व नाम मूल संस्कृत अर्थ आध्यात्मिक व खगोलीय गुणधर्म ज्योतिषीय प्रभाव व फलित
1. धनिष्ठा (Dhanishtha)अत्यंत धनी, समृद्ध, प्रसिद्धअखंड धन-ऐश्वर्य व भूमिरीयल एस्टेट सम्राट व अरबपति
2. वासावी (Vasavi)अष्ट वसुओं का अपना पावन क्षेत्र8 वसुओं का ब्रह्मांडीय ऐश्वर्यअपार संपत्ति, भवन व वाहन
3. श्रविष्ठा (Shravishta)अति-प्रसिद्ध व ख्याति प्राप्तचारों दिशाओं में गूंजती ख्यातिविश्वप्रसिद्ध संगीतकार व स्टार
4. डमरुकरा (Damarukara)शिव के डमरू की नाद शक्तिसंगीत, नृत्य, ताल व लयसंगीत निर्देशक व कोरियोग्राफर
5. भौमा (Bhauma)मंगल देव का अपना नक्षत्रनिडर पराक्रम व निर्माण शक्तिसर्वोच्च सेनापति व सर्जन
6. भीष्म सम्बद्धा (Bhishma)भीष्म पितामह का जन्म नक्षत्रअखंड प्रतिज्ञा व तपोबलअभेद्य चरित्र व उच्च पद

✨ 5. धनिष्ठा नक्षत्र में 4 चरण नवमांश विभाजन तालिका (4 Padas Table)

नक्षत्र चरण (Pada) विस्तार अंश (Degree Range) नवमांश राशि (Navamsha) नवमांश स्वामी फलित गुणधर्म व स्वभाव
प्रथम चरण (Pada 1)23° 20' मकर - 26° 40' मकरसिंह नवमांश (Leo)सूर्य (Sun)प्रतापी उद्योगपति, राजसी नेता।
द्वितीय चरण (Pada 2)26° 40' मकर - 30° 00' मकरकन्या नवमांश (Virgo)बुध (Mercury)उच्च मंगल! पुष्कर! रीयल एस्टेट किंग।
तृतीय चरण (Pada 3)00° 00' कुंभ - 03° 20' कुंभतुला नवमांश (Libra)शुक्र (Venus)संगीत सम्राट, लक्जरी बिल्डर।
चतुर्थ चरण (Pada 4)03° 20' कुंभ - 06° 40' कुंभवृश्चिक नवमांश (Scorpio)मंगल (Mars)स्वगृही नवमांश! निडर योद्धा, सेनापति।

♉ 6. धनिष्ठा नक्षत्र में 9 नवग्रहों का विस्तृत फलित तालिका चार्ट (9 Planets in Dhanishtha Table)

ग्रह स्थिति (Planet in Dhanishtha) ज्योतिषीय स्थिति व सम्बद्धता फलित प्रभाव व व्यक्तित्व (Personality Traits) करियर व राजयोग (Career & Success) सावधानियां व सात्विक परिहार
1. सूर्य (Sun) in धनिष्ठा मित्र राशि / प्रतापी सम्राट तेजस्वी स्वाभिमान, धनपति। रीयल एस्टेट सम्राट, CEO, IAS। अहम् से बचें; सूर्य अर्घ्य।
2. चंद्रमा (Moon) in धनिष्ठा जन्म नक्षत्र / संगीतमय मन शांत, संगीतप्रेमी, अत्यंत धनी। प्रसिद्ध संगीतकार, बिल्डर, बैंकर। जिद्दीपन से बचें; शिव पूजन।
3. मंगल (Mars) in धनिष्ठा मकर में परम उच्च (28° Exalted)! महा-पराक्रम धन राजयोग! शीर्ष रीयल एस्टेट किंग, सेनापति। अति-क्रोध से बचें; मूंगा।
4. बुध (Mercury) in धनिष्ठा मित्र राशि / चतुर वित्तीय बुद्धि तीक्ष्ण प्रबंधन, संगीत मर्मज्ञ। सॉफ्टवेयर आर्किटेक्ट, CA, RJ। अति-संदेह से बचें; दुर्गा पूजा।
5. गुरु (Jupiter) in धनिष्ठा मित्र राशि / धर्म धन राजयोग महा-विद्वान, सात्विक धनपति। चीफ जस्टिस, कुलपति, धर्मगुरु। ज्ञान के अहम् से बचें; पुखराज।
6. शुक्र (Venus) in धनिष्ठा मित्र राशि / लक्जरी सम्राट अलौकिक सौंदर्य, संगीत स्टार। फिल्म निर्माता, लक्जरी ब्रांड्स हेड। अति-विलासिता से बचें; श्रीसूक्त पाठ।
7. शनि (Saturn) in धनिष्ठा स्वराशि (Own Sign - मकर/कुंभ) महा-कर्मठ राजयोग! धीर। माइनिंग प्रमुख, न्यायाधीश, उद्योगपति। अकेलापन से बचें; तेल दान।
8. राहु (Rahu) in धनिष्ठा मित्र राशि / आधुनिक संगीत अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति, AI संगीत। अंतर्राष्ट्रीय संगीत स्टार, AI बिल्डर। अनैतिक मार्ग से बचें; सप्तधान्य दान।
9. केतु (Ketu) in धनिष्ठा मित्र राशि / नाद मोक्ष अगाध नाद साधना, वैराग्य। मूक साधक, तांत्रिक, योग आचार्य। अति-उदासीनता से बचें; गणेश पूजन।
10 11 12 1 2 3 4 5 6 7 8 9 मंगल मंगल 28°
📊 चित्र 1: धनिष्ठा नक्षत्र भचक्र स्थिति एवं मंगल उच्चत्व कुण्डली (प्रथम व द्वितीय चरण मकर 23° 20'-30° 00' मंगल 28° उच्च = रुचक राजयोग | तृतीय व चतुर्थ कुंभ 00° 00'-06° 40' | अष्ट वसु)

🥁 धनिष्ठा नक्षत्र: अष्ट वसु, शिव डमरू एवं मंगल का रुचक राजयोग

  • मंगल का परम उच्चत्व (28° Capricorn): धनिष्ठा नक्षत्र के द्वितीय चरण (कन्या नवमांश, 28° मकर) में सेनापति मंगल देव साक्षात अपने परम उच्चत्व पर होते हैं, जिससे रुचक महापुरुष राजयोग निर्मित होता है। यह जातक को महा-सेनापति, रियल एस्टेट सम्राट, सर्जन या अजेय नेतृत्व शक्ति देता है।
  • अष्ट वसु व भीष्म पितामह: इसके देवता 8 अष्ट वसु (समृद्धि व ऐश्वर्य के अधिपति) हैं। महाभारत के अजेय योद्धा गंगापुत्र 'भीष्म पितामह' अष्टम वसु (द्यौ) के साक्षात अवतार थे, जिनका जन्म धनिष्ठा नक्षत्र में हुआ था।
  • शिव डमरू व संगीत (Naad Brahma): इसका प्रतीक भगवान शिव का 'डमरू' व बांसुरी है, जो जातक को संगीत वादन, ताल-लय, नृत्य, अभिनय और अखंड धन-धान्य (Dhanishtha = The Richest) प्रदान करता है।

📝 7. मुख्य बिंदु सार-संक्षेप (Chapter Summary)

  • 1. भचक्र का त्रयोविंशति नक्षत्र: धनिष्ठा नक्षत्र मकर राशि के 23° 20' से कुंभ के 06° 40' तक फैला भचक्र का त्रयोविंशति नक्षत्र व धन का धाम है।
  • 2. अष्ट वसु व भीष्म पितामह कथा: इसके देवता 8 अष्ट वसु (ऐश्वर्य देव) हैं तथा भीष्म पितामह के प्रादुर्भाव व भीष्म प्रतिज्ञा की कथा इससे सम्बद्ध है।
  • 3. शिव डमरू प्रतीक व नाद-ब्रह्म: शिव डमरू प्रतीक 14 माहेश्वर सूत्रों व ब्रह्मांडीय नाद-ब्रह्म (संगीत, नृत्य व ध्वनि तरंगों) का द्योतक है।
  • 4. 4 चरण नवमांश विभाजन: इसके द्वितीय चरण (कन्या नवमांश) में मंगल 28° पर परम उच्च व पुष्कर पद में होता है जो अरबपति राजयोग देता है।
  • 5. सात्विक परिहार: हठी स्वभाव से बचने हेतु भगवान शिव के 'शिव तांडव स्तोत्र' का पाठ, हनुमान जी की उपासना व त्रिशूल में मूंगा धारण शुभ रहता है।

❓ 8. बहुप्रचलित प्रश्नोत्तरी (SEO FAQs)

प्रश्न 1: अष्ट वसुओं (8 Vasus) की पौराणिक कथा और 'गंगापुत्र भीष्म पितामह' का धनिष्ठा नक्षत्र से क्या संबंध है?
उत्तर: पौराणिक ग्रंथों के अनुसार अष्ट वसु ब्रह्मांडीय ऐश्वर्य और प्रकाश के आठ देवता हैं। भीष्म पितामह स्वयं अष्टम वसु (प्रभास) के अवतार थे। अष्ट वसुओं के आशीर्वाद से धनिष्ठा नक्षत्र में जन्मे जातक को भीष्म पितामह जैसी 'अखंड प्रतिज्ञा', अपराजित पराक्रम, और जीवन में कभी न समाप्त होने वाली धन-संपदा प्राप्त होती है।
प्रश्न 2: भगवान शिव के 'डमरू' (Damaru) का धनिष्ठा नक्षत्र के जातकों की संगीत व कला पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर: भगवान शिव के डमरू से संपूर्ण ब्रह्मांडीय नाद (14 माहेश्वर सूत्र) का जन्म हुआ था। धनिष्ठा नक्षत्र का प्रतीक डमरू व बांसुरी है। इसी कारण धनिष्ठा नक्षत्र में जन्मे जातक ताल, लय, संगीत, नृत्य, वाद्ययंत्र बजाने, और साउंड इंजीनियरिंग में महारत हासिल करके विश्वप्रसिद्ध संगीतकार या कलाकार बनते हैं।
प्रश्न 3: धनिष्ठा नक्षत्र के जातकों के लिए सबसे अचूक सात्विक उपाय क्या हैं?
उत्तर: धनिष्ठा नक्षत्र के स्वामी मंगल देव और देवता अष्ट वसु हैं। इनके दोष शमन व अखंड धन-ऐश्वर्य हेतु प्रतिदिन भगवान शिव के 'शिव तांडव स्तोत्र' अथवा 'हनुमान चालीसा' का पाठ करना, मंगलवार को मसूर दाल व गुड़ का दान करना, और अनामिका उंगली में तांबे या सोने में 5 से 7 रत्ती का शुद्ध इतालवी मूंगा (Red Coral) धारण करना परम लाभदायक है।
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