← ग्रंथालय
वैदिक ज्योतिष / 27 नक्षत्र महाविज्ञान
18px
वैदिक ज्योतिष मॉड्यूल: 27 नक्षत्र महाविज्ञान

अध्याय 4.13: हस्त नक्षत्र (Hasta Nakshatra) विस्तृत परिचय, पौराणिक कथाएं, 4 चरण नवमांश, 9 नवग्रह प्रभाव व सात्विक उपाय

हस्त नक्षत्र का अति-विस्तृत परिचय, सविता देव व गायत्री मंत्र की पौराणिक महागाथा, चंद्रमा स्वामित्‍व, 4 चरण नवमांश व 9 नवग्रह फल।

भचक्र का त्रयोदश नक्षत्र हस्त (Hasta - हस्तशिल्प, जादू एवं प्राण-शक्ति नक्षत्र) का विस्तृत खगोलीय व पौराणिक स्वरूप, सविता देव (प्रातःकालीन सूर्य) व गायत्री मंत्र की पावन महागाथा, खुली हथेली (Open Hand / Five Fingers) प्रतीक की कलात्मक ऊर्जा, चंद्रमा का स्वामित्‍व, कन्या राशि (10° 00' से 23° 20' - जहाँ बुध 15° पर परम उच्च होता है!) विस्तार, 4 पद नवमांश विभाजन, 9 नवग्रहों का हस्त नक्षत्र में विस्तृत फलित एवं सात्विक उपाय
📜 मेंटर Vikraant का आत्मीय मार्गदर्शन (Guru's Keynote)

प्रिय शिष्य! वैदिक ज्योतिष में 360 अंश के संपूर्ण आकाशमंडल का त्रयोदश नक्षत्र 'हस्त' (Hasta) है। कन्या राशि में 10° 00' से 23° 20' तक फैला यह नक्षत्र हाथों की अद्भुत कार्यकुशलता (Dexterity), शिल्पकला, शल्य चिकित्सा (Surgery), जादूगरी, गायत्री मंत्र का प्रादुर्भाव, और सविता देव की स्वर्णिम प्राण-शक्ति का साक्षात प्रतीक है। महर्षि पराशर के अनुसार, हस्त नक्षत्र के स्वामी मन, कल्पना और रसों के कारक 'चंद्रमा देव' हैं और इसके अधिष्ठात्री देवता प्रातःकालीन सूर्य साक्षात 'सविता देव' (Savitar) हैं। कन्या राशि में स्थित होने के कारण (जहाँ बुध 15° पर परम उच्च होता है) यह नक्षत्र जातक को हस्तशिल्प का शहंशाह, अद्वितीय व्यापारी और कुशल हीलर बनाता है।

"सविता अधिपा यस्य शशांकः स्वामी महाबलः।
कन्यामध्ये संस्थितो ध्रुवः सर्वकला प्रदायकः॥
हस्ततलरूपो देवगणो आदिनाड़ी धर्मसाधकः।
शिल्पविद्याप्रदो ज्ञानी सर्वसिद्धि प्रदायकः॥"


(भावार्थ: सविता देव जिनके अधिष्ठात्री देवता हैं, महाबली चंद्रमा देव जिनके स्वामी हैं, जो कन्या राशि के मध्य में स्थित, ध्रुव स्वभाव वाले और सर्व-कला को प्रदान करने वाले हैं, वे हस्त नक्षत्र हैं। खुली हथेली प्रतीक, देव गण, आदि नाड़ी से युक्त यह नक्षत्र शिल्पकला प्रदान कर सर्वसिद्धि देता है।)

💡 1. परिचय (Introduction & Utility of Hasta Nakshatra)

  • भचक्र का त्रयोदश द्वार एवं चंद्रमा का महा-स्वामित्‍व: हस्त (Hasta) संपूर्ण भचक्र का त्रयोदश नक्षत्र (10° 00' से 23° 20' कन्या राशि) है, जिसके स्वामी मन, कल्पना, संवेदनशीलता और जल के कारक 'चंद्रमा देव' हैं। यह नक्षत्र मन और हाथों के अद्भुत तालमेल का मूलाधार है।
  • सविता देव अधिष्ठाता एवं क्षिप्र/शीघ्र स्वभाव: इस नक्षत्र के देवता 12 आदित्यों में से प्रातःकालीन सूर्य 'सविता देव' हैं। इसका स्वभाव 'क्षिप्र व शीघ्र' (Swift & Light) है; इसमें त्वरित निर्णय लेने, हाथों की सफाई से काम करने, और सेकंडों में जटिल समस्याओं को हल करने की शक्ति होती है।
  • खुली हथेली व पांच उंगलियां (Open Hand) प्रतीक का रहस्य: हस्त का प्रतीक चिह्न 'खुली हथेली' (Open Hand) अथवा 'मुट्ठी' है। हथेली की पांच उंगलियां पंच-महाभूतों को दर्शाती हैं। यह प्रतीक निर्माण, अभय दान, हस्तरेखा विज्ञान, और जादूगरी का द्योतक है।
  • 4 चरण नवमांश विभाजन (4 Padas Analysis): हस्त के 4 चरण क्रमशः मेष (मंगल), वृषभ (शुक्र - 15° कन्या में बुध परम उच्च व पुष्कर नवमांश!), मिथुन (बुध) और कर्क (चंद्रमा) नवमांश में विभाजित हैं, जो जातक को तीक्ष्ण शल्य क्रिया, सर्व-श्रेष्ठ शिल्पकला, कोडिंग व अंतर्ज्ञानी हीलिंग देते हैं।
  • शारीरिक अंग व कालपुरुष हाथ तंत्र: कालपुरुष के शरीर में हस्त नक्षत्र हथेली (Palms), उंगलियाँ, कलाई (Wrists), हाथ की नसें और हाथों का संपूर्ण तंत्रिका तंत्र का स्वामी है।
  • देव गण, आदि नाड़ी व महिष (भैंसा) योनि का प्रभाव: हस्त नक्षत्र देव गण, आदि नाड़ी और महिष योनि से सम्बद्ध है; यह कुशल सर्जनों, घड़ीसाजों, मूर्तिकारों, चित्रकारों, जादूगरों, हस्तरेखा शास्त्रियों, सॉफ्टवेयर कोडर्स, ज्वैलर्स और वास्तुविदों का नेतृत्व करता है।
  • सात्विक परिहार एवं ऊर्जा संतुलन: हस्त नक्षत्र के जातकों को हाथ की सफाई से छल करने, चालाकी, और मानसिक चंचलता से बचने हेतु सूर्य देव को अर्घ्य, गायत्री मंत्र जाप, तथा मोती या चांदी धारण करना अत्यंत फलदायी होता है।

📖 2. हस्त नक्षत्र का पौराणिक, खगोलीय एवं आध्यात्मिक स्वरूप (Puranic & Astronomical Attributes)

2.1 सविता देव (प्रातःकालीन सूर्य) की पावन पौराणिक महागाथा एवं गायत्री मंत्र

ऋग्वेद और शतपथ ब्राह्मण के अनुसार, 'सविता' सूर्य देव का वह पावन स्वरूप है जो प्रातःकाल की प्रथम किरण के साथ ब्रह्मांड के समस्त अज्ञान व अंधकार को मिटा देता है। सविता देव संपूर्ण प्राणियों को कर्म करने की प्रेरणा और जीवन-शक्ति (Pranic Energy) प्रदान करते हैं।

महर्षि विश्वामित्र ने सविता देव की इसी दिव्य किरणों का ध्यान करके महा-मंत्र "गायत्री मंत्र" (ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्) की रचना की थी। हस्त नक्षत्र पर साक्षात सविता देव का आधिपत्य होने से इसके जातक के हाथों में दिव्य आरोग्य शक्ति और गायत्री मंत्र जैसी सात्विक ऊर्जा प्रवाहित होती है।

2.2 'खुली हथेली' (Open Hand) एवं हाथों की पांच उंगलियों का आध्यात्मिक रहस्य

हस्त नक्षत्र का मुख्य प्रतीक खुली हथेली (Hand) है। मनुष्य की हथेली में संपूर्ण ब्रह्मांड का नक्शा और पंच-तत्त्व (अग्नि, वायु, आकाश, पृथ्वी, जल) विद्यमान रहते हैं। महर्षि पराशर के अनुसार, हस्त नक्षत्र का जातक अपने हाथों से मिट्टी को भी छू ले तो वह सोना बन जाती है। ऐसे जातक महान चित्रकार, मूर्तिकार, संगीतकार (तबला व वायलिन वादक), और सूक्ष्म शल्य चिकित्सक (Surgeon) बनते हैं।

2.3 चंद्रमा (स्वामी), बुध (कन्या राशि - 15° उच्च) एवं सविता का महा-हस्तशिल्प योग

हस्त नक्षत्र पूरी तरह कन्या राशि (स्वामी बुध - जहाँ बुध 15° पर परम उच्च होता है) में स्थित है। नक्षत्र स्वामी चंद्रमा (मन व कल्पना), राशि स्वामी बुध (बुद्धि व हाथ) और देवता सविता (प्रकाश) का यह त्रिकोण जातक को 'सुपर कंप्यूटर हस्त-कौशल' देता है। ऐसा जातक अपनी मुट्ठी में समय और परिस्थितियों को कैद करने की सामर्थ्य रखता है।

2.4 सविता देव की स्वर्णिम भुजाएं एवं अभय दान की गाथा

पौराणिक ग्रंथों में वर्णन आता है कि सविता देव की दोनों भुजाएं शुद्ध स्वर्ण की बनी हुई हैं, जिनसे वे समस्त जीवों को सुरक्षा और अन्नदान प्रदान करते हैं। हस्त नक्षत्र का जातक अत्यंत दयालु, दानवीर, हस्तरेखा विज्ञान (Palmistry) का विशेषज्ञ और दूसरों के दुखों को अपने हाथों की स्पर्श हीलिंग (Reiki / Healing Touch) से मिटाने वाला होता है।

2.5 प्रथम चरण (10° 00' - 13° 20' कन्या): मेष नवमांश, मंगल का पराक्रम व त्वरित शल्य क्रिया

हस्त नक्षत्र का प्रथम चरण कन्या राशि (10° 00' से 13° 20') मेष नवमांश में पड़ता है, जिसके स्वामी मंगल देव हैं। मेष एक चर अग्नि तत्व राशि है। यह चरण जातक को हाथों की तीव्र गति, शल्य चिकित्सा (Surgery) में निपुणता, एथलेटिक कला और निडर साहसिक निर्णय लेने की शक्ति प्रदान करता है।

2.6 द्वितीय चरण (13° 20' - 16° 40' कन्या): वृषभ नवमांश, बुध का 15° परम उच्चत्व व पुष्कर नवमांश

हस्त नक्षत्र का द्वितीय चरण कन्या राशि (13° 20' से 16° 40') वृषभ नवमांश में पड़ता है, जिसके स्वामी शुक्र देव हैं। इसी चरण में 15° पर बुध परम उच्च (Exalted Mercury) होता है एवं यह पावन पुष्कर नवमांश है! यह चरण जातक को दुनिया का सर्व-श्रेष्ठ मूर्तिकार, ज्वैलर, घड़ीसाज, चित्रकार और असीम धन-संपदा प्रदान करता है।

2.7 तृतीय चरण (16° 40' - 20° 00' कन्या): मिथुन नवमांश, बुध का स्वगृही कूटनीतिक दिमाग

हस्त नक्षत्र का तृतीय चरण कन्या राशि (16° 40' से 20° 00') मिथुन नवमांश में पड़ता है, जिसके स्वामी स्वयं बुध देव हैं। यह 'स्वगृही नवमांश' है! मिथुन द्विस्वभाव वायु तत्व राशि है। यह चरण जातक को तीक्ष्ण कंप्यूटर कोडिंग, जादूगरी, हस्तरेखा विज्ञान, लेखक व मीडिया सम्राट बनने का राजयोग देता है।

2.8 चतुर्थ चरण (20° 00' - 23° 20' कन्या): कर्क नवमांश, चंद्रमा की अंतर्दृष्टि व सात्विक हीलिंग

हस्त नक्षत्र का चतुर्थ चरण कन्या राशि (20° 00' से 23° 20') कर्क नवमांश में पड़ता है, जिसके स्वामी स्वयं चंद्रमा देव हैं। यह नक्षत्र स्वामी चंद्रमा का अपना नवमांश है! यह चरण जातक को असीम संवेदनशीलता, स्पर्श हीलिंग (Pranic Healing), मातृत्व करुणा और दूसरों के संताप हरने की कला देता है।

📊 3. हस्त नक्षत्र के मूल खगोलीय एवं पौराणिक मापदंडों की महा-मास्टर तालिका

गुण व मापदंड (Attribute) ज्योतिषीय मान व पौराणिक विवरण (Astrological & Puranic Details)
भचक्र क्रम व विस्तार (Zodiac Range)त्रयोदश नक्षत्र (10° 00' से 23° 20' कन्या राशि तक)
स्वामी ग्रह (Ruling Planet)चंद्रमा देव (Moon / सोम / मन व रस कारक)
अधिष्ठात्री देवता (Deity)सविता देव (Savitar / प्रातःकालीन सूर्य / गायत्री अधिपति)
प्रतीक चिह्न (Symbol)खुली हथेली / पांच उंगलियां / मुट्ठी (Open Hand / Fist)
गण व नाड़ी (Gana & Nadi)देव गण (Deva Gana) / आदि नाड़ी (Adi Nadi)
योनि व तत्व (Yoni & Tattva)महिष योनि (Buffalo / भैंसा) / पृथ्वी तत्व
नक्षत्र स्वभाव (Quality)क्षिप्र व शीघ्र (Swift & Light)
सम्बद्ध राशि (Primary Sign)कन्या राशि (Virgo / 15° पर बुध परम उच्च)
दिशा व स्थिति (Direction)दक्षिण दिशा (South) / तिर्यकमध्य नक्षत्र
शरीर के अंग (Body Signification)हथेली, उंगलियाँ, कलाई व हाथों का तंत्रिका तंत्र

🔥 4. हस्त नक्षत्र के विविध नाम एवं symbolic गुणधर्म तालिका

सं. व नाम मूल संस्कृत अर्थ आध्यात्मिक व खगोलीय गुणधर्म ज्योतिषीय प्रभाव व फलित
1. हस्त (Hasta)हाथ, हथेली, नियंत्रणहाथों का अद्भुत कलात्मक कौशलमूर्तिकार, सर्जन व चित्रकार
2. सावित्रा (Savitra)सविता देव का अपना धामगायत्री मंत्र व स्वर्णिम प्रकाशआरोग्य हीलिंग व ब्रह्म-ज्ञान
3. करा (Kara)कर्म करने वाली भुजाएंकर्मनिष्ठता व अभय दानदानी, हस्तरेखा शास्त्री व जादूगर
4. मुष्टि (Mushti)मुट्ठी, समय पर नियंत्रणअवसरों को मुट्ठी में कैद करनाचतुर व्यापारी व कोडिंग एक्सपर्ट
5. क्षिप्रा (Kshipra)त्वरित गति से कार्य करने वालासेकंडों में समस्याओं का समाधानघड़ीसाज, शल्य चिकित्सक व AI
6. चंद्रभ (Chandrabha)चंद्रमा देव का अपना नक्षत्रमन व हाथों का अद्भुत तालमेलसंगीतज्ञ, हीलर व कला प्रेमी

✨ 5. हस्त नक्षत्र में 4 चरण नवमांश विभाजन तालिका (4 Padas Table)

नक्षत्र चरण (Pada) विस्तार अंश (Degree Range) नवमांश राशि (Navamsha) नवमांश स्वामी फलित गुणधर्म व स्वभाव
प्रथम चरण (Pada 1)10° 00' - 13° 20'मेष नवमांश (Aries)मंगल (Mars)त्वरित शल्य चिकित्सक, साहसी।
द्वितीय चरण (Pada 2)13° 20' - 16° 40'वृषभ नवमांश (Taurus)शुक्र (Venus)15° बुध उच्च! पुष्कर! मूर्तिकार, धनी।
तृतीय चरण (Pada 3)16° 40' - 20° 00'मिथुन नवमांश (Gemini)बुध (Mercury)स्वगृही! कोडिंग, जादूगर, वक्ता।
चतुर्थ चरण (Pada 4)20° 00' - 23° 20'कर्क नवमांश (Cancer)चंद्रमा (Moon)स्वगृही! स्पर्श हीलर, दयालु।

♉ 6. हस्त नक्षत्र में 9 नवग्रहों का विस्तृत फलित तालिका चार्ट (9 Planets in Hasta Table)

ग्रह स्थिति (Planet in Hasta) ज्योतिषीय स्थिति व सम्बद्धता फलित प्रभाव व व्यक्तित्व (Personality Traits) करियर व राजयोग (Career & Success) सावधानियां व सात्विक परिहार
1. सूर्य (Sun) in हस्त अधिष्ठात्री देवता क्षेत्र (Savitar) तेजस्वी कलाकार, प्रातःकालीन ऊर्जा। शल्य चिकित्सक, कला निर्देशक, CEO। अहम् से बचें; सूर्य अर्घ्य।
2. चंद्रमा (Moon) in हस्त स्वराशि (Own Nakshatra) महा-हस्तशिल्प राजयोग! शांत मन। चित्रकार, हीलर, हस्तरेखा विशेषज्ञ। मानसिक चंचलता से बचें; शिव पूजा।
3. मंगल (Mars) in हस्त मित्र राशि / उग्र कला हाथों की तीव्र गति, शल्य योद्धा। शीर्ष सर्जन, मूर्तिकार, एथलीट। चालाकी से बचें; हनुमान चालीसा।
4. बुध (Mercury) in हस्त 15° पर परम उच्च (Exalted)! महा-बुद्धि राजयोग! जीनियस कोडर। IT सम्राट, डेटा वैज्ञानिक, ज्वैलर। छल-कपट से बचें; दुर्गा पूजा।
5. गुरु (Jupiter) in हस्त मित्र राशि / सात्विक गुरु महा-विद्वान, हस्तरेखा मर्मज्ञ, शिक्षक। चीफ जस्टिस, प्रोफेसर, सात्विक हीलर। ज्ञान के अहम् से बचें; पुखराज।
6. शुक्र (Venus) in हस्त नीच राशि (कन्या भाग) कलात्मक हाथों का संघर्ष, चित्रकार। कला व्यापारी, घड़ीसाज, डिजाइनर। अति-कामुकता से बचें; श्रीसूक्त पाठ।
7. शनि (Saturn) in हस्त मित्र राशि / धीर शिल्पी तपा हुआ कर्मठ, कठोर अनुशासित। माइनिंग इंजीनियर, घड़ीसाज, सर्जन। आलस्य से बचें; शनिवार तेल दान।
8. राहु (Rahu) in हस्त मित्र राशि / जादूगर बुद्धि हाथ की सफाई, अद्भुत जादूगरी। जादूगर, साइबर एक्सपर्ट, AI रिसर्च। अनैतिक मार्ग से बचें; सप्तधान्य दान।
9. केतु (Ketu) in हस्त मित्र राशि / स्पर्श हीलिंग अगाध आत्मिक स्पर्श हीलिंग, मोक्ष। रेकी मास्टर, योग साधक, संत। अति-विरक्ति से बचें; गणेश पूजन।
6 7 8 9 10 11 12 1 2 3 4 5 चंद्र बुध 15° चंद्र
📊 चित्र 1: हस्त नक्षत्र भचक्र स्थिति एवं बुध उच्चत्व कुण्डली (कन्या राशि 10° 00' से 23° 20' | बुध 15° पर परम उच्च = भद्र महापुरुष राजयोग | चंद्रमा स्वामित्‍व | सविता देव अधिष्ठाता)

🖐️ हस्त नक्षत्र: सविता देव, गायत्री मंत्र एवं बुध का भद्र राजयोग

  • बुध का परम उच्चत्व (15° Virgo): हस्त नक्षत्र के द्वितीय चरण (वृषभ नवमांश, 15° कन्या) में ग्रहों के राजकुमार बुध देव साक्षात अपने परम उच्चत्व को प्राप्त कर भद्र महापुरुष राजयोग बनाते हैं, जिससे जातक विश्वस्तरीय गणितज्ञ, कोडर, सीए या वाणिज्यपति बनता है।
  • सविता देव व गायत्री मंत्र: इसके अधिष्ठात्री प्रातःकालीन जीवनदाता सविता देव हैं, जिनके प्रकाश से जगत को पावन गायत्री महामंत्र की प्राप्ति हुई। यह नक्षत्र जातक को वाक्-सिद्धि और मंत्र शक्ति देता है।
  • हस्तशिल्प व स्पर्श हीलिंग: इसका प्रतीक खुली हथेली (Five Fingers) है। यह शल्य चिकित्सा (Surgeon), हस्तरेखा, रेकी हीलिंग, संगीत वादन और बारीक तकनीकी शिल्पकला में अद्वितीय महारत प्रदान करता है।

📝 7. मुख्य बिंदु सार-संक्षेप (Chapter Summary)

  • 1. भचक्र का त्रयोदश नक्षत्र: हस्त नक्षत्र कन्या राशि के 10° 00' से 23° 20' तक फैला भचक्र का त्रयोदश नक्षत्र व शिल्पकला का धाम है।
  • 2. सविता देव व गायत्री मंत्र कथा: इसके देवता सविता देव (प्रातःकालीन सूर्य) हैं, जिनसे महा-मंत्र 'गायत्री मंत्र' का प्रादुर्भाव हुआ था।
  • 3. खुली हथेली व उच्च बुध: 15° कन्या में बुध के परम उच्च होने व हथेली प्रतीक से जातक सर्जन, मूर्तिकार व कोडिंग का शहंशाह बनता है।
  • 4. 4 चरण नवमांश विभाजन: इसके 4 चरण मेष, वृषभ (15° उच्च बुध पुष्कर पद), मिथुन (बुध स्वगृही) व कर्क (चंद्रमा स्वगृही) नवमांश में विभाजित हैं।
  • 5. सात्विक परिहार: चालाकी से बचने हेतु सूर्य देव को जल अर्घ्य, गायत्री मंत्र जाप, गोसेवा व कनिष्ठिका में मोती/पन्ना धारण करना शुभ रहता है।

❓ 8. बहुप्रचलित प्रश्नोत्तरी (SEO FAQs)

प्रश्न 1: सविता देव की पौराणिक कथा और गायत्री मंत्र का हस्त नक्षत्र से क्या आध्यात्मिक संबंध है?
उत्तर: ऋग्वेद के अनुसार सविता देव सूर्य का प्रातःकालीन दिव्य स्वरूप हैं जो संपूर्ण सृष्टि को नई चेतना व प्राण-शक्ति प्रदान करते हैं। विश्वामित्र जी द्वारा रचित 'गायत्री मंत्र' साक्षात सविता देव की आराधना का मंत्र है। इसी कारण हस्त नक्षत्र के जातकों की हथेली में दिव्य आरोग्य और हीलिंग टच (Healing Touch) होता है।
प्रश्न 2: हस्त नक्षत्र में जन्मे जातक शल्य चिकित्सा (Surgery), चित्रकारी और कोडिंग में क्यों महा-सफल होते हैं?
उत्तर: हस्त नक्षत्र का मुख्य प्रतीक 'खुली हथेली' है, जो कन्या राशि में स्थित है जहाँ बुध 15° पर परम उच्च होता है। नक्षत्र स्वामी चंद्रमा (कल्पना) और राशि स्वामी उच्च बुध (हाथों का कौशल) का यह दुर्लभ संगम जातक के हाथों और मस्तिष्क में अद्भुत तालमेल स्थापित करता है, जिससे वह बारीक शल्य क्रिया, चित्रकारी और कोडिंग में दुनिया पर राज करता है।
प्रश्न 3: हस्त नक्षत्र के जातकों के लिए सबसे अचूक सात्विक उपाय क्या हैं?
उत्तर: हस्त नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा देव और देवता साक्षात सविता देव हैं। इनके दोष शमन व हाथों की कलात्मक उन्नति हेतु प्रतिदिन प्रातःकाल सूर्य देव को जल अर्घ्य देना, 108 बार 'गायत्री मंत्र' का जाप करना, सोमवार को शिवलिंग पर जल चढ़ाकर कच्चे दूध का अभिषेक करना, और कनिष्ठिका उंगली में चांदी में 5 से 7 रत्ती का शुद्ध सच्चा मोती (Pearl) या पन्ना धारण करना परम लाभदायक है।
☸ दैनिक खगोलीय पंचांग घड़ी
--:--:-- --
⚡ सक्रिय चौघड़िया
लोडिंग...
☀️ वर्तमान होरा
लोडिंग...
⚠️ राहुकाल (सावधानी)
लोडिंग...
🌟 अभिजित मुहूर्त (उत्तम)
11:48 - 12:36