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वैदिक ज्योतिष / 27 नक्षत्र महाविज्ञान
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वैदिक ज्योतिष मॉड्यूल: 27 नक्षत्र महाविज्ञान

अध्याय 4.14: चित्रा नक्षत्र (Chitra Nakshatra) विस्तृत परिचय, पौराणिक कथाएं, 4 चरण नवमांश, 9 नवग्रह प्रभाव व सात्विक उपाय

चित्रा नक्षत्र का अति-विस्तृत परिचय, देवशिल्पी त्वष्टा (विश्वकर्मा) व सुदर्शन चक्र निर्माण की कथा, मंगल स्वामित्‍व, 4 चरण नवमांश व 9 नवग्रह फल।

भचक्र का चतुर्दश नक्षत्र चित्रा (Chitra - वास्तुकला, सौंदर्य एवं रत्न-तराश नक्षत्र) का विस्तृत खगोलीय व पौराणिक स्वरूप, देवशिल्पी त्वष्टा (विश्वकर्मा) व सूर्य देव को तराशकर सुदर्शन चक्र-त्रिशूल निर्माण की पावन महागाथा, चमकता हुआ बहुमूल्य रत्न (Brilliant Gem / Pearl) प्रतीक की अलौकिक ऊर्जा, मंगल का स्वामित्‍व, कन्या-तुला (23° 20' कन्या से 06° 40' तुला) विस्तार, 4 पद नवमांश विभाजन, 9 नवग्रहों का चित्रा नक्षत्र में विस्तृत फलित एवं सात्विक उपाय
📜 मेंटर Vikraant का आत्मीय मार्गदर्शन (Guru's Keynote)

प्रिय शिष्य! वैदिक ज्योतिष में 360 अंश के संपूर्ण आकाशमंडल का चतुर्दश नक्षत्र 'चित्रा' (Chitra) है। कन्या राशि में 23° 20' से लेकर तुला राशि में 06° 40' तक फैला यह नक्षत्र अलौकिक वास्तुकला (Architecture), भव्य भवन निर्माण, रत्न तराशने की कला, फैशन डिजाइनिंग, और देवशिल्पी त्वष्टा (विश्वकर्मा) की असीम रचनात्मक शक्ति का साक्षात प्रतीक है। महर्षि पराशर के अनुसार, चित्रा नक्षत्र के स्वामी पराक्रम, ऊर्जा और निर्माण के कारक 'मंगल देव' हैं और इसके अधिष्ठात्री देवता देवताओं के मुख्य शिल्पी 'त्वष्टा देव' (Tvashtar / Vishwakarma) हैं। यह नक्षत्र किसी भी खुरदरे पत्थर को तराशकर उसे दुनिया का सबसे मूल्यवान 'हीरा' (Gem) बना देने का अद्भुत वरदान देता है।

"त्वष्टा अधिपा यस्य भौमः (मंगलः) स्वामी महाबलः।
कन्या-तुला संस्थितो चित्रो अति-सुंदर कर्मकारकः॥
रत्नरूपो राक्षसगणो मध्यनाड़ी धर्मसाधकः।
वास्तुविद्याप्रदो धनी सर्वसिद्धि प्रदायकः॥"


(भावार्थ: त्वष्टा देव जिनके अधिष्ठात्री देवता हैं, महाबली मंगल देव जिनके स्वामी हैं, जो कन्या व तुला राशि की संधि पर स्थित, अत्यंत सुंदर चित्रमय कर्म करने वाले हैं, वे चित्रा नक्षत्र हैं। चमकता रत्न प्रतीक, राक्षस गण, मध्य नाड़ी से युक्त यह नक्षत्र वास्तु विद्या व असीम धन प्रदान कर सर्वसिद्धि देता है।)

💡 1. परिचय (Introduction & Utility of Chitra Nakshatra)

  • भचक्र का चतुर्दश द्वार एवं मंगल का महा-स्वामित्‍व: चित्रा (Chitra) संपूर्ण भचक्र का चतुर्दश नक्षत्र (23° 20' कन्या से 06° 40' तुला राशि) है, जिसके स्वामी ऊर्जा, निर्माण, साहस और वास्तुकला के कारक 'मंगल देव' हैं। यह नक्षत्र संरचनात्मक डिजाइन और सौंदर्य का मूलाधार है।
  • त्वष्टा (विश्वकर्मा) अधिष्ठाता एवं मृदु/तीक्ष्ण मिश्रित स्वभाव: इस नक्षत्र के देवता देवताओं के सर्वोच्च शिल्पी 'त्वष्टा देव' (Tvashtar) हैं। इसका स्वभाव 'मृदु व कलात्मक' (Soft & Creative) है; इसमें भौतिक संसार को सुंदर रूप देने, नीरस वस्तुओं में जीवन फूंकने और रत्न तराशने की शक्ति होती है।
  • चमकता रत्न व मोती (Shining Gem/Pearl) प्रतीक का रहस्य: चित्रा का प्रतीक चिह्न 'चमकता हुआ बहुमूल्य हीरा/रत्न' (Brilliant Jewel / Pearl) है। यह प्रतीक आत्म-निखार, सम्मोहक सौंदर्य, कलात्मक पूर्णता, और आंतरिक प्रतिभा के प्रकटन का द्योतक है।
  • 4 चरण नवमांश विभाजन (4 Padas Analysis): चित्रा के 4 चरण क्रमशः सिंह (सूर्य), कन्या (बुध - कन्या भाग वर्गोत्तम!), तुला (शुक्र - तुला भाग वर्गोत्तम व पुष्कर!) और वृश्चिक (मंगल) नवमांश में विभाजित हैं, जो जातक को शाही आर्किटेक्चर, सूक्ष्म इंजीनियरिंग, फैशन किंगडम व गूढ़ कला तंत्र देते हैं।
  • शारीरिक अंग व कालपुरुष माथा-गर्दन: कालपुरुष के शरीर में चित्रा नक्षत्र माथा (Forehead), गर्दन की नसें, पेट की दीवार (Abdominal wall), गर्भाशय व मूत्रमार्ग का स्वामी है।
  • राक्षस गण, मध्य नाड़ी व व्याघ्र (बाघ) योनि का प्रभाव: चित्रा नक्षत्र राक्षस गण, मध्य नाड़ी और व्याघ्र योनि से सम्बद्ध है; यह महान आर्किटेक्ट्स, सिविल इंजीनियरों, ज्वैलरी डिजाइनरों, इंटीरियर डिजाइनरों, फैशन मॉडल, अभिनेताओं, मूर्तिकारों और चित्रकारों का नेतृत्व करता है।
  • सात्विक परिहार एवं ऊर्जा संतुलन: चित्रा नक्षत्र के जातकों को अत्यधिक अहंकार, अपनी सुंदरता का घमंड, और दूसरों की आलोचना करने से बचने हेतु हनुमान जी की आराधना, 'सुंदरकांड' पाठ, तथा मूंगा या ओपल धारण करना अत्यंत फलदायी होता है।

📖 2. चित्रा नक्षत्र का पौराणिक, खगोलीय एवं आध्यात्मिक स्वरूप (Puranic & Astronomical Attributes)

2.1 देवशिल्पी त्वष्टा (विश्वकर्मा) की पौराणिक महागाथा एवं सुदर्शन चक्र का निर्माण

ऋग्वेद, विष्णु पुराण और ब्रह्मांड पुराण के अनुसार, त्वष्टा देव देवताओं के सर्वोच्च शिल्पी और वास्तुकला (Architecture) के अधिपति हैं। पौराणिक महागाथा के अनुसार, जब सूर्य देव का विवाह महर्षि विश्वकर्मा की पुत्री संज्ञा से हुआ, तो सूर्य देव की प्रचंड ज्वाला और ताप को संज्ञा सहन नहीं कर सकीं।

तब संज्ञा के कष्ट को दूर करने हेतु देवशिल्पी त्वष्टा ने सूर्य देव को अपने संदासी चक्र पर चढ़ाया और उनकी ज्वाला के 1/16वें भाग को तराशकर शांत कर दिया। सूर्य देव की उसी तराशी हुई दिव्य ज्वाला से त्वष्टा ने भगवान विष्णु के लिए 'सुदर्शन चक्र', भगवान शिव के लिए 'त्रिशूल', देवराज इंद्र के लिए 'वज्र', और कार्तिकेय के लिए 'शक्ति अस्त्र' का निर्माण किया। चित्रा नक्षत्र त्वष्टा की इसी अलौकिक तराशने की क्षमता का साक्षात स्वरूप है।

2.2 'चमकता हुआ बहुमूल्य रत्न' (Shining Gem) प्रतीक का पावन आध्यात्मिक रहस्य

चित्रा नक्षत्र का मुख्य प्रतीक एक चमचमाता हुआ बहुमूल्य हीरा या मोती (Brilliant Jewel) है। प्रकृति में हीरा शुरू में एक साधारण काला कोयला या खुरदरा पत्थर होता है। किंतु जब उस पर अत्यधिक दबाव पड़ता है और कुशल शिल्पी उसे विभिन्न कोणों से तराशता है, तो वह विश्व का सबसे मूल्यवान रत्न बन जाता है। इसी प्रकार, चित्रा नक्षत्र के जातक जीवन के संघर्षों में तपकर स्वयं को एक अनमोल हीरा बना लेते हैं।

2.3 मंगल (स्वामी), त्वष्टा (अधिष्ठाता) एवं कन्या-तुला का महा-वास्तु योग

चित्रा नक्षत्र का प्रथम आधा भाग कन्या राशि (बुध - गणित व सूक्ष्मता) और अंतिम आधा भाग तुला राशि (शुक्र - सौंदर्य व लक्जरी) में स्थित है। नक्षत्र स्वामी मंगल (इंजीनियरिंग) और त्वष्टा की कला मिलकर जातक को भव्य महलों, बुर्ज खलीफा जैसी गगनचुंबी इमारतों, और लक्जरी कारों का महान डिजाइनर बनाती है।

2.4 स्वर्गलोक अमरावती व द्वारका नगरी निर्माण की गाथा

पौराणिक कथाओं में वर्णन आता है कि त्वष्टा (विश्वकर्मा) ने ही देवताओं की स्वर्गपुरी 'अमरावती', रावण की स्वर्णिम 'लंकापुरी', और भगवान श्री कृष्ण की समुद्र के बीच स्थित दिव्य 'द्वारका नगरी' की रचना की थी। चित्रा नक्षत्र का जातक जिस भी स्थान पर कदम रखता है, उसे अपने कलात्मक विचारों से स्वर्ग जैसा सुंदर बना देता है।

2.5 प्रथम चरण (23° 20' - 26° 40' कन्या): सिंह नवमांश, सूर्य का तेज व शाही आर्किटेक्ट

चित्रा नक्षत्र का प्रथम चरण कन्या राशि (23° 20' से 26° 40') सिंह नवमांश में पड़ता है, जिसके स्वामी सूर्य देव हैं। सिंह एक स्थिर अग्नि तत्व राशि है। यह चरण जातक को प्रतापी स्वाभिमान, सरकारी भवनों व महलों के निर्माण का दायित्व, और शाही आर्किटेक्ट बनने का राजयोग प्रदान करता है।

2.6 द्वितीय चरण (26° 40' - 30° 00' कन्या): कन्या नवमांश, बुध की सूक्ष्मता व वर्गोत्तम इंजीनियरिंग

चित्रा नक्षत्र का द्वितीय चरण कन्या राशि (26° 40' से 30° 00') कन्या नवमांश में पड़ता है, जिसके स्वामी बुध देव हैं। राशि और नवमांश दोनों कन्या होने से यह 'वर्गोत्तम' (Vargottama) होता है! यह चरण जातक को अति-सूक्ष्म गणितीय इंजीनियरिंग, ज्वैलरी डिजाइनिंग, और 3D कंप्यूटर मोशन ग्राफिक्स का जीनियस बनाता है।

2.7 तृतीय चरण (00° 00' - 03° 20' तुला): तुला नवमांश, शुक्र का सौंदर्य, वर्गोत्तम व पुष्कर नवमांश

चित्रा नक्षत्र का तृतीय चरण तुला राशि (00° 00' से 03° 20') तुला नवमांश में पड़ता है, जिसके स्वामी स्वयं शुक्र देव हैं। यह 'वर्गोत्तम' एवं पावन 'पुष्कर नवमांश' है! यह चरण जातक को अलौकिक शारीरिक सौंदर्य, फैशन किंगडम, फिल्म सेट डिजाइनिंग, और विश्वस्तरीय प्रसिद्धि प्रदान करता है।

2.8 चतुर्थ चरण (03° 20' - 06° 40' तुला): वृश्चिक नवमांश, मंगल का स्वगृही जुनून व गूढ़ कला

चित्रा नक्षत्र का चतुर्थ चरण तुला राशि (03° 20' से 06° 40') वृश्चिक नवमांश में पड़ता है, जिसके स्वामी स्वयं नक्षत्र स्वामी मंगल देव हैं। यह 'स्वगृही नवमांश' है! वृश्चिक स्थिर जल तत्व राशि है। यह चरण जातक को उग्र कलात्मक जुनून, थिएटर, गुप्त तंत्र-वास्तु ज्ञान, और जटिल शल्य निर्माण की सामर्थ्य देता है।

📊 3. चित्रा नक्षत्र के मूल खगोलीय एवं पौराणिक मापदंडों की महा-मास्टर तालिका

गुण व मापदंड (Attribute) ज्योतिषीय मान व पौराणिक विवरण (Astrological & Puranic Details)
भचक्र क्रम व विस्तार (Zodiac Range)चतुर्दश नक्षत्र (23° 20' कन्या से 06° 40' तुला राशि तक)
स्वामी ग्रह (Ruling Planet)मंगल देव (Mars / कुज / ऊर्जा व निर्माण कारक)
अधिष्ठात्री देवता (Deity)त्वष्टा देव (Tvashtar / विश्वकर्मा / देवताओं के मुख्य शिल्पी)
प्रतीक चिह्न (Symbol)चमकता हुआ बहुमूल्य रत्न / मोती (Shining Gem / Pearl)
गण व नाड़ी (Gana & Nadi)राक्षस गण (Rakshasa Gana) / मध्य नाड़ी (Madhya Nadi)
योनि व तत्व (Yoni & Tattva)व्याघ्र योनि (Tiger / बाघ) / अग्नि-वायु तत्व
नक्षत्र स्वभाव (Quality)मृदु व कलात्मक (Soft & Creative)
सम्बद्ध राशि (Primary Sign)कन्या (2 चरण) व तुला राशि (2 चरण)
दिशा व स्थिति (Direction)पश्चिम दिशा (West) / तिर्यकमध्य नक्षत्र
शरीर के अंग (Body Signification)माथा, गर्दन की नसें, पेट की दीवार व गर्भाशय

🔥 4. चित्रा नक्षत्र के विविध नाम एवं symbolic गुणधर्म तालिका

सं. व नाम मूल संस्कृत अर्थ आध्यात्मिक व खगोलीय गुणधर्म ज्योतिषीय प्रभाव व फलित
1. चित्रा (Chitra)चित्रमय, अद्भुत, सुंदरअलौकिक सौंदर्य व वास्तुकलामहान आर्किटेक्ट व कलाकार
2. त्वाष्ट्री (Tvashtri)त्वष्टा (विश्वकर्मा) का अपना धामदिव्य अस्त्रों व महलों का निर्माणसुदर्शन चक्र व अमरावती निर्माता
3. मणिरत्ना (Maniratna)चमचमाता हुआ अनमोल हीरासंघर्षों में तपकर निखरनाविश्वस्तरीय ज्वैलरी डिजाइनर
4. वास्तुकरी (Vastukari)वास्तु शास्त्र की जनकभव्य नगरों व भवनों की रचनासिविल इंजीनियर व बिल्डर
5. कुजभ (Kujabha)मंगल देव का अपना नक्षत्रनिडर निर्माण ऊर्जा व पराक्रमनिर्माण क्षेत्र में अपार सफलता
6. सुदर्शना (Sudarshana)सुंदर दर्शन देने वालीसम्मोहक व्यक्तित्व व आकर्षणफैशन आइकॉन, मॉडल व स्टार

✨ 5. चित्रा नक्षत्र में 4 चरण नवमांश विभाजन तालिका (4 Padas Table)

नक्षत्र चरण (Pada) विस्तार अंश (Degree Range) नवमांश राशि (Navamsha) नवमांश स्वामी फलित गुणधर्म व स्वभाव
प्रथम चरण (Pada 1)23° 20' कन्या - 26° 40' कन्यासिंह नवमांश (Leo)सूर्य (Sun)प्रतापी आर्किटेक्ट, शाही पद।
द्वितीय चरण (Pada 2)26° 40' कन्या - 30° 00' कन्याकन्या नवमांश (Virgo)बुध (Mercury)वर्गोत्तम! सूक्ष्म गणित, ज्वैलर।
तृतीय चरण (Pada 3)00° 00' तुला - 03° 20' तुलातुला नवमांश (Libra)शुक्र (Venus)वर्गोत्तम! पुष्कर! सुपर मॉडल।
चतुर्थ चरण (Pada 4)03° 20' तुला - 06° 40' तुलावृश्चिक नवमांश (Scorpio)मंगल (Mars)स्वगृही! गहन कलात्मक जुनून।

♉ 6. चित्रा नक्षत्र में 9 नवग्रहों का विस्तृत फलित तालिका चार्ट (9 Planets in Chitra Table)

ग्रह स्थिति (Planet in Chitra) ज्योतिषीय स्थिति व सम्बद्धता फलित प्रभाव व व्यक्तित्व (Personality Traits) करियर व राजयोग (Career & Success) सावधानियां व सात्विक परिहार
1. सूर्य (Sun) in चित्रा मित्र राशि / प्रतापी शिल्पी तेजस्वी डिजाइनर, राजा जैसा ठाट। मुख्य आर्किटेक्ट, शहरी विकास प्रमुख। अहम् से बचें; सूर्य अर्घ्य।
2. चंद्रमा (Moon) in चित्रा मित्र राशि / सौंदर्य प्रिय अति-सुंदर नेत्र, कलाप्रेमी, धनी। अभिनेता, फैशन डिजाइनर, ज्वैलर। घमंड से बचें; शिव पूजन।
3. मंगल (Mars) in चित्रा स्वराशि (Own Nakshatra) महा-वास्तु राजयोग! निडर शिल्पी। शीर्ष सिविल इंजीनियर, बिल्डर, सर्जन। क्रोध पर नियंत्रण रखें; हनुमान पूजा।
4. बुध (Mercury) in चित्रा मित्र राशि / सूक्ष्म गणित तीक्ष्ण वास्तुकला बुद्धि, डिजाइनर। 3D एनिमेशन हेड, ज्वैलरी किंग। आलोचक बनने से बचें; दुर्गा पूजा।
5. गुरु (Jupiter) in चित्रा मित्र राशि / सात्विक वास्तुज्ञ महा-विद्वान, वास्तु शास्त्र विशेषज्ञ। चीफ आर्किटेक्ट, कुलपति, गुरु। ज्ञान के अहम् से बचें; पुखराज।
6. शुक्र (Venus) in चित्रा तुला भाग में स्वगृही! महा-सौंदर्य राजयोग! कामदेव। सुपर मॉडल, फैशन सम्राट, फिल्म स्टार। अति-विलासिता से बचें; श्रीसूक्त पाठ।
7. शनि (Saturn) in चित्रा तुला भाग में परम उच्च (Exalted)! महा-कर्मठ राजयोग! धीर शिल्पी। माइनिंग किंग, स्ट्रक्चरल इंजीनियर। निराशावाद से बचें; तेल दान।
8. राहु (Rahu) in चित्रा मित्र राशि / आधुनिक वास्तुकला आभासी वास्तुकला, VFX, 3D डिजाइन। VFX डायरेक्टर, डिजिटल आर्टिस्ट। छल-कपट से बचें; सप्तधान्य दान।
9. केतु (Ketu) in चित्रा मित्र राशि / गुप्त कला सूक्ष्म शिल्प साधना, मोक्ष कला। रत्न परीक्षक, तंत्र साधक, हीलर। अवसाद से बचें; गणेश पूजन।
6 7 8 9 10 11 12 1 2 3 4 5 मंगल शुक्र 27°
📊 चित्र 1: चित्रा नक्षत्र भचक्र स्थिति एवं वास्तु शिल्पकला कुण्डली (प्रथम व द्वितीय चरण कन्या 23° 20'-30° 00' | तृतीय व चतुर्थ चरण तुला 00° 00'-06° 40' | त्वष्टा देवता | मंगल स्वामित्‍व)

💎 चित्रा नक्षत्र: देवशिल्पी त्वष्टा, रत्न-तराश एवं वास्तु वैभव

  • कन्या व तुला का शिल्प संगम: चित्रा नक्षत्र का आधा भाग बुध की व्यावहारिक व गणनात्मक कन्या राशि में और आधा भाग शुक्र की कलात्मक व सौन्दर्यमयी तुला राशि में फैला है। यह वास्तुकला (Architecture), इंटीरियर डिजाइनिंग और रत्न व्यवसाय का सर्वोच्च नक्षत्र है।
  • देवशिल्पी त्वष्टा (विश्वकर्मा): इसके देवता देवशिल्पी त्वष्टा हैं, जिन्होंने सूर्य को तराशकर भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र, शिव जी का त्रिशूल और यमराज का दंड बनाया था।
  • दोहरे वर्गोत्तम पद (Pada 2 & 3): चित्रा का द्वितीय चरण कन्या नवमांश में और तृतीय चरण तुला नवमांश में वर्गोत्तम होता है, जो जातक को असीम रूप-सौंदर्य, डिजाइन प्रतिभा और यश प्रदान करता है।

📝 7. मुख्य बिंदु सार-संक्षेप (Chapter Summary)

  • 1. भचक्र का चतुर्दश नक्षत्र: चित्रा नक्षत्र 23° 20' कन्या से 06° 40' तुला तक फैला भचक्र का चतुर्दश नक्षत्र व वास्तुकला का धाम है।
  • 2. त्वष्टा (विश्वकर्मा) व सुदर्शन चक्र कथा: इसके देवता देवशिल्पी त्वष्टा हैं, जिन्होंने सूर्य को तराशकर विष्णु जी का सुदर्शन चक्र बनाया था।
  • 3. चमकता रत्न प्रतीक व महा-वास्तु योग: चमकता हीरा प्रतीक और मंगल-बुध-शुक्र का मेल जातक को आर्किटेक्ट व ज्वैलरी किंग बनाता है।
  • 4. 4 चरण नवमांश विभाजन: इसके 4 चरण सिंह, कन्या (वर्गोत्तम), तुला (वर्गोत्तम व पुष्कर पद) व वृश्चिक (मंगल स्वगृही) नवमांश में विभाजित हैं।
  • 5. सात्विक परिहार: अहम् से बचने हेतु हनुमान चालीसा पाठ, सुंदरकांड पाठ, तथा अनामिका में शुद्ध त्रिकोणी मूंगा या ओपल धारण करना शुभ रहता है।

❓ 8. बहुप्रचलित प्रश्नोत्तरी (SEO FAQs)

प्रश्न 1: देवशिल्पी त्वष्टा (विश्वकर्मा) की पौराणिक कथा और सुदर्शन चक्र के निर्माण का चित्रा नक्षत्र से क्या संबंध है?
उत्तर: पौराणिक ग्रंथों के अनुसार जब सूर्य देव का तेज असहनीय हो गया, तो त्वष्टा देव ने उन्हें अपने चक्र पर चढ़ाकर तराशा था और उसी तराशी हुई ज्वाला से विष्णु जी का सुदर्शन चक्र व शिव जी का त्रिशूल बनाया था। चित्रा नक्षत्र त्वष्टा की इसी अलौकिक तराशने (Sculpting & Polishing) की शक्ति का प्रतीक है, जिससे इस नक्षत्र के जातक साधारण वस्तु को भी अनमोल बना देते हैं।
प्रश्न 2: चित्रा नक्षत्र के जातक सिविल इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर और फैशन डिजाइनिंग में दुनिया पर क्यों राज करते हैं?
उत्तर: चित्रा नक्षत्र के स्वामी निर्माण के कारक मंगल देव हैं और इसके देवता साक्षात विश्वकर्मा (त्वष्टा) हैं। इसका प्रथम भाग कन्या (सूक्ष्म गणित) और द्वितीय भाग तुला (सौंदर्य) में पड़ता है। यह दुर्लभ खगोलीय मेल जातक को गणितीय मजबूती और अलौकिक सौंदर्यबोध का संगम प्रदान करता है, जिससे वे विश्वस्तरीय आर्किटेक्ट व फैशन किंग बनते हैं।
प्रश्न 3: चित्रा नक्षत्र के जातकों के लिए सबसे अचूक सात्विक उपाय क्या हैं?
उत्तर: चित्रा नक्षत्र के स्वामी मंगल देव और देवता साक्षात त्वष्टा देव (विश्वकर्मा) हैं। इनके दोष शमन व वास्तुकला में अखंड सफलता हेतु मंगलवार को हनुमान जी के सम्मुख चमेली के तेल का दीपक जलाकर 'सुंदरकांड' अथवा 'हनुमान चालीसा' का पाठ करना, गरीबों को लाल मिठाई बांटना, और अनामिका उंगली में तांबे या सोने में शुद्ध इटैलियन त्रिकोणी मूंगा (Red Coral) या ओपल धारण करना परम लाभदायक है।
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