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वैदिक ज्योतिष / चिकित्सा एवं मेदिनी ज्योतिष
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वैदिक ज्योतिष मॉड्यूल: चिकित्सा एवं मेदिनी ज्योतिष

अध्याय 17.7: प्राकृतिक आपदाएं, महामारी, अतिवृष्टि, अकाल, भूकंप चक्र व ग्रहीय ग्रहण प्रभाव

प्राकृतिक आपदाएं (Natural Calamities), भूकम्प (Earthquakes Astrology), बाढ़, अतिवृष्टि, महामारी (Pandemic Astrology) एवं ग्रहीय ग्रहणों का खगोलीय प्रभाव।

प्राकृतिक उपद्रव एवं भूकम्प का खगोलीय विज्ञान — पृथ्वी तत्व राशियों में क्रूर ग्रहीय योग, सूर्य/चंद्र ग्रहण का प्रभाव एवं महामारी चक्र
📜 मेंटर Vikraant का आत्मीय मार्गदर्शन (Guru's Keynote)

प्रिय शिष्य! प्राकृतिक आपदाएं (भूकंप, सुनामी, अतिवृष्टि, अकाल, महामारी) जब आती हैं, तो लाखों जीव प्रभावित होते हैं। वाराहमिहिर जी के अनुसार भूकम्प और महामारी का सीधा संबंध सूर्य-चंद्र ग्रहण (Eclipses) और पृथ्वी तत्व राशियों (वृषभ, कन्या, मकर) में पाप ग्रहों के संचरण से है।

जब एक ही माह में 2 ग्रहण (सूर्य व चंद्र) लग जाएं और शनि-राहु-मंगल का क्रूर संबंध बने, तो उसी क्षेत्र में भूकम्प या महामारी का प्रकोप होता है। आइए, इन खगोलीय आपदा योगों को समझें!

🌊 1. आपदा एवं भूकम्प खगोलीय सारणी

आपदा का प्रकार (Calamity Type) मुख्य ग्रहीय योग (Planetary Combinations)
भूकम्प (Earthquake) पृथ्वी तत्व में क्रूर ग्रह — वृषभ/कन्या/मकर में शनि-राहु-मंगल की युति, ग्रहण के 15 दिनों के भीतर।
अतिवृष्टि व बाढ़ (Floods) जल तत्व राशियों (कर्क, वृश्चिक, मीन) में गुरु, शुक्र व चंद्रमा की युति पर राहु का प्रभाव।
महामारी (Pandemic) शनि + राहु या शनि + केतु की वायु/जल राशियों में युति तथा 6ठे/8वें भाव की सामूहिक पीड़ितता।

❓ 2. बहुप्रचलित प्रश्नोत्तरी (FAQs)

प्रश्न 1: क्या ग्रहण का प्रभाव उसी देश में होता है जहाँ वह दिखाई देता है?
उत्तर: हाँ! सूर्य या चंद्र ग्रहण जिस देश के अक्षांश-रेखांश पर दृश्यमान होता है, उसी भौगोलिक क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाओं की तीव्रता सर्वाधिक रहती है।
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