प्रिय शिष्य! जब 6ठे भाव (रोग), 8वें भाव (असाध्य व्याधि) और 12वें भाव (अस्पताल में भर्ती) के स्वामी एक साथ जुड़ते हैं, तो जातक को शल्य चिकित्सा (Surgery) या गंभीर बीमारी का सामना करना पड़ता है।
मंगल शल्य चिकित्सा (चीर-फाड़) का कारक है और केतु सर्जिकल कैंची का। यदि मंगल या केतु 8वें भाव से जुड़े हों, तो शल्य चिकित्सा अनिवार्य हो जाती है। आइए, असाध्य रोगों और सर्जरी के समय निर्धारण को समझें!
🔪 1. शल्य चिकित्सा (Surgery Yogas & Timing)
कुण्डली में शल्य चिकित्सा (ऑपरेशन) के मुख्य योग निम्नलिखित हैं:
1. मंगल + 8वां भाव: मंगल जब 8वें भाव का स्वामी होकर 6ठे या 12वें भाव से संबंध बनाता है।
2. केतु का प्रभाव: केतु 6ठे या 8वें भाव में स्थित होकर पीड़ित हो।
3. दशा काल: 6ठे/8वें भाव के स्वामी की महादशा में जब मंगल या केतु की भुक्ति आती है, तब शल्य चिकित्सा होती है।