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वैदिक ज्योतिष / चिकित्सा एवं मेदिनी ज्योतिष
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वैदिक ज्योतिष मॉड्यूल: चिकित्सा एवं मेदिनी ज्योतिष

अध्याय 17.3: असाध्य रोग, कैंसर, हृदय रोग, शल्य चिकित्सा (सर्जरी) एवं मारक दशा timing

गंभीर व असाध्य रोग (Chronic Diseases), कैंसर योग, शल्य चिकित्सा (Surgery Timing), मारक एवं बाधक दशा तथा बीमारी घटने का सटीक ज्योतिषीय काल।

गंभीर व्याधियों का ज्योतिषीय निदान, शल्य चिकित्सा (Surgery) के योग, मारक-बाधक दशा संचरण एवं आरोग्य प्राप्ति विधान
📜 मेंटर Vikraant का आत्मीय मार्गदर्शन (Guru's Keynote)

प्रिय शिष्य! जब 6ठे भाव (रोग), 8वें भाव (असाध्य व्याधि) और 12वें भाव (अस्पताल में भर्ती) के स्वामी एक साथ जुड़ते हैं, तो जातक को शल्य चिकित्सा (Surgery) या गंभीर बीमारी का सामना करना पड़ता है।

मंगल शल्य चिकित्सा (चीर-फाड़) का कारक है और केतु सर्जिकल कैंची का। यदि मंगल या केतु 8वें भाव से जुड़े हों, तो शल्य चिकित्सा अनिवार्य हो जाती है। आइए, असाध्य रोगों और सर्जरी के समय निर्धारण को समझें!

🔪 1. शल्य चिकित्सा (Surgery Yogas & Timing)

कुण्डली में शल्य चिकित्सा (ऑपरेशन) के मुख्य योग निम्नलिखित हैं:

📐 शल्य चिकित्सा योग सूत्र:

1. मंगल + 8वां भाव: मंगल जब 8वें भाव का स्वामी होकर 6ठे या 12वें भाव से संबंध बनाता है।
2. केतु का प्रभाव: केतु 6ठे या 8वें भाव में स्थित होकर पीड़ित हो।
3. दशा काल: 6ठे/8वें भाव के स्वामी की महादशा में जब मंगल या केतु की भुक्ति आती है, तब शल्य चिकित्सा होती है।

❓ 2. बहुप्रचलित प्रश्नोत्तरी (FAQs)

प्रश्न 1: क्या महामृत्युंजय जाप से शल्य चिकित्सा की पीड़ा कम होती है?
उत्तर: हाँ! शल्य चिकित्सा से पूर्व महामृत्युंजय अनुष्ठान करने से शल्य क्रिया निर्विघ्न संपन्न होती है और शीघ्र स्वास्थ्य लाभ मिलता है।
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