📜 मेंटर Vikraant का आत्मीय मार्गदर्शन
प्रिय शिष्य! प्राचीन आयुर्वेद आचार्यों चरक व सुश्रुत का कथन था: "बिना ज्योतिष ज्ञान के कोई भी चिकित्सक पूर्ण नहीं हो सकता।" चिकित्सा ज्योतिष का उद्देश्य डराना नहीं, बल्कि संभावित रोग का पहले से पता लगाकर सही समय पर उपचार करना है!
1. त्रिदोष सिद्धांत और ज्योतिषीय सम्बंध (Tridosha Theory)
| दोष (Dosha) | शारीरिक लक्षण | संबंधित ग्रह | संबंधित राशियां |
|---|---|---|---|
| वात (Vata) | वायु, जोड़ों का दर्द, नसों में खिंचाव, गैस | शनि, राहु, बुध | मिथुन, तुला, कुंभ |
| पित्त (Pitta) | अग्नि, बुखार, एसिडिटी, सूजन, रक्त विकार | सूर्य, मंगल, केतु | मेष, सिंह, धनु |
| कफ (Kapha) | जल/म्यूकस, मोटापा, डायबिटीज, अस्थमा | चंद्रमा, शुक्र, गुरु | वृषभ, कर्क, वृश्चिक, मीन |
2. रोग निर्धारण के प्राथमिक भाव (Disease Triplicity)
रोग त्रिकोण सूत्र: 6ठा भाव (रोग की उत्पत्ति) + 8वां भाव (दीर्घकालिक संकट) + 12वां भाव (अस्पताल भर्ती)।