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वैदिक ज्योतिष / चिकित्सा एवं मेदिनी ज्योतिष
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वैदिक ज्योतिष मॉड्यूल: चिकित्सा एवं मेदिनी ज्योतिष

अध्याय 17.3: ग्रहों का रोगों से संबंध

प्रिय शिष्य! सूर्य आत्मा की अग्नि है, चंद्रमा मन व द्रव है, मंगल रक्त है, बुध त्वचा व नसें है, गुरु लिवर व वसा है, शुक्र प्रजनन रस है, तथा शनि जोड़ों की शक्त...

📜 मेंटर Vikraant का आत्मीय मार्गदर्शन

प्रिय शिष्य! सूर्य आत्मा की अग्नि है, चंद्रमा मन व द्रव है, मंगल रक्त है, बुध त्वचा व नसें है, गुरु लिवर व वसा है, शुक्र प्रजनन रस है, तथा शनि जोड़ों की शक्ति है। ग्रहों के पीड़ित होने पर संबंधित शारीरिक तंत्र में बीमारी उत्पन्न होती है!

1. नवग्रह एवं संबंधित बीमारियां तालिका

ग्रह (Planet) मुख्य शारीरिक कार्यकत्व पीड़ित होने पर संभावित रोग
सूर्य (Sun) हृदय, अस्थि, दृष्टि, ऊर्जा हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, आंखों का रोग, गंजापन
मंगल (Mars) रक्त, मज्जा, मांसपेशियां दुर्घटना, शल्य चिकित्सा (ऑपरेशन), बवासीर, अल्सर
बुध (Mercury) त्वचा, तंत्रिका तंत्र (Nerves) त्वचा रोग (Psoriasis), नसों की कमजोरी, हकलाना
बृहस्पति (Jupiter) यकृत (Liver), वसा, कोलेस्ट्रॉल मोटापा, डायबिटीज, लिवर सिरोसिस, पीलिया

2. व्यावहारिक कुण्डली उदाहरण

उदाहरण: बुध पीड़ित होने पर त्वचा रोग (Psoriasis)

मिथुन लग्न में बुध 6ठे भाव में राहु और मंगल के साथ स्थित होने से त्वचा और नसों में गंभीर एलर्जिक इंफेक्शन पैदा हुआ।

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