प्रिय शिष्य! पराशरी ज्योतिष में केंद्र-त्रिकोण स्वामियों का संबंध राजयोग बनाता है, किंतु जैमिनी ज्योतिष में चर कारकों के आपसी संबंध (Chara Karaka Combinations) से महा-राजयोगों का निर्माण होता है!
जब आत्माकारक (AK) और अमात्यकारक (AmK) एक साथ बैठें या राशि दृष्टि से एक-दूसरे को देखें, तो जातक समाज में सर्वोच्च पद, शासन-सत्ता और अपार ख्याति प्राप्त करता है। आइए, जैमिनी पद्धति के मुख्य राजयोगों और धनाढ्य योगों को समझें!
👑 1. जैमिनी के 5 प्रमुख महा-राजयोग (5 Jaimini Raja Yogas)
| राजयोग का नाम | ग्रहीय संयोजन एवं स्थिति (planetary Combination) | प्राप्त होने वाला फल एवं प्रभाव |
|---|---|---|
| AK + AmK महा-राजयोग | आत्माकारक और अमात्यकारक युति में हों या राशि दृष्टि से परस्पर संबद्ध हों। | सर्वोच्च राजयोग — देश का राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, आईएएस या उद्योगपति पद। |
| AK + PK राजयोग | आत्माकारक और पुत्रकारक की युति या राशि दृष्टि। | अद्वितीय बुद्धि, विद्वता, मंत्री पद एवं राजनीतिक उच्च पद। |
| AK + DK राजयोग | आत्माकारक और दाराकारक का संबंध। | अपार व्यापारिक समृद्धि, जीवनसाथी के आगमन से भाग्योदय। |
| कारकांश 10वां भाव शुभ ग्रह | कारकांश लग्न से 10वें भाव में शुभ ग्रह (गुरु/शुक्र/बुध) स्थित हों। | स्थायी नौकरी, आजीविका में निरंतर वृद्धि एवं यश। |
| पद लग्न (AL) + उपपद (UL) संबंध | अरूढ़ लग्न (AL) और उपपद लग्न (UL) का 1, 5, 9 या 7वें भाव में संबंध। | विवाह के पश्चात् अपार सामाजिक प्रतिष्ठा एवं संपत्ति। |
💰 2. जैमिनी धनाढ्य योग (Jaimini Wealth Yogas)
जैमिनी ज्योतिष में धन प्राप्ति हेतु 11वें और 2रे भाव के अरूढ़ पदों का विशेष महत्व है:
1. A11 (लाभ पद) में शुभ ग्रह: यदि 11वें भाव के अरूढ़ पद (A11) में चंद्रमा, शुक्र या गुरु स्थित हों, तो जातक के पास अकूत धन संपत्ति होती है।
2. चंद्र-शुक्र राशि दृष्टि: जैमिनी राशि दृष्टि द्वारा यदि चंद्रमा और शुक्र एक-दूसरे को देख रहे हों, तो जातक 'धनाढ्य' बनता है।