प्रिय शिष्य! वैदिक ज्योतिष की उप-शाखाओं में महर्षि जैमिनी कृत जैमिनी सूत्रम (Jaimini Sutras) अत्यंत प्रामाणिक और रहस्यमयी प्रणाली है। पराशरी ज्योतिष में जहाँ भाव और ग्रहीय स्वामित्व स्थिर होते हैं, जैमिनी ज्योतिष में ग्रहों के अंशों (Degrees) के आधार पर उनके कारकत्व बदल जाते हैं! जिन्हें चर कारक (Chara Karakas) कहा जाता है।
कुण्डली में जो ग्रह सर्वाधिक अंश (Degree) पर होता है, वह आत्माकारक (Atmakaraka - AK) बनता है और राजा का पद धारण करता है। आत्माकारक नवमांश में जिस राशि में स्थित होता है, उसे कारकांश (Karakamsha) कहा जाता है। आइए, जैमिनी ज्योतिष के 7 चर कारकों की व्यवस्था को विस्तार से समझें!
👑 1. जैमिनी 7 चर कारक (7 Chara Karakas Order)
कुण्डली में राहु और केतु को छोड़कर (या 8 कारक प्रणाली में राहु को शामिल कर) ग्रहों को अंशों के घटते क्रम में व्यवस्थित किया जाता है:
| क्रम | चर कारक का नाम (Chara Karaka) | अंशों का क्रम (Degree Order) | प्रतिनिधित्व एवं जीवन क्षेत्र |
|---|---|---|---|
| 1 | आत्माकारक (Atmakaraka - AK) | सर्वाधिक अंश (Highest Degree) | आत्मा, स्वयं जातक, राजा, जीवन का मूल उद्देश्य, मोक्ष का द्वार। |
| 2 | अमात्यकारक (Amatyakaraka - AmK) | द्वितीय सर्वाधिक अंश | अमात्य (मंत्री), आजीविका, करियर, पद-प्रतिष्ठा, कर्म क्षेत्र। |
| 3 | भ्रातृकारक (Bhratru Karaka - BK) | तृतीय सर्वाधिक अंश | भाई-बहन, गुरु, परामर्शदाता, साहस, सहायता। |
| 4 | मातृकारक (Matru Karaka - MK) | चतुर्थ सर्वाधिक अंश | माता, भूमि, भवन, वाहन, मन की शांति, गृह सुख। |
| 5 | पुत्रकारक (Putra Karaka - PK) | पंचम सर्वाधिक अंश | संतान, बुद्धि, ज्ञान, मंत्र शक्ति, उच्च शिक्षा। |
| 6 | ज्ञातिकारक (Gnati Karaka - GK) | षष्ठम सर्वाधिक अंश | संबंधी, शत्रु, रोग, बाधाएं, संघर्ष, प्रतिस्पर्धा। |
| 7 | दाराकारक (Dara Karaka - DK) | न्यूनतम अंश (Lowest Degree) | जीवनसाथी, पति/पत्नी, व्यवसाय साझेदार, जनसंपर्क। |
🕉️ 2. कारकांश कुण्डली (Karakamsha Chart) का निर्माण
जैमिनी ज्योतिष में कारकांश कुण्डली फलित का मुख्य आधार है:
- 1. आत्माकारक की पहचान: लग्न कुण्डली में सर्वाधिक अंश वाले ग्रह (AK) को चिन्हित करें।
- 2. नवमांश संचरण (Navamsha Position): आत्माकारक ग्रह नवमांश कुण्डली (D9) में जिस राशि में स्थित हो, उस राशि को लग्न मानकर पूरी कुण्डली पुनर्रचित करें। वही कारकांश कुण्डली (Karakamsha Chart) कहलाती है।
- 3. कारकांश फलित: कारकांश लग्न से 12वें भाव में स्थित ग्रह जातक के ईस्ट देव (Istha Devata) और मोक्ष मार्ग को प्रकट करते हैं।