प्रिय शिष्य! पराशरी ज्योतिष में विवाह हेतु 7वां भाव देखा जाता है, किंतु जैमिनी ज्योतिष में विवाह और जीवनसाथी के वास्तविक स्वरूप की कुंजी उपपद लग्न (Upapada Lagna - UL) के पास होती है।
12वें भाव का अरूढ़ पद ही उपपद लग्न (UL) कहलाता है। UL की स्थिति, उस पर ग्रहों के प्रभाव और उसके 2रे भाव से यह स्पष्ट पता चलता है कि जातक का विवाह स्थायी रहेगा या उसमें विच्छेद होगा, जीवनसाथी किस स्वभाव का होगा तथा विवाह से धन लाभ होगा या हानि। आइए, UL की साधन विधि को समझें!
💍 1. उपपद लग्न (Upapada Lagna - UL) साधन विधि
UL ज्ञात करने का शास्त्रीय नियम निम्नलिखित है:
1. कुण्डली के 12वें भाव के स्वामी (12th Lord) को देखें कि वह 12वें भाव से कितने घर दूर बैठा है।
2. 12वें स्वामी से उतने ही घर आगे गिनें, वही पद राशि उपपद लग्न (UL) बनेगी।
विशेष अपवाद: यदि पद राशि 1ले या 7वें भाव में पड़े, तो 10वें भाव आगे की राशि को UL माना जाता है।
🌸 2. UL से जीवनसाथी एवं वैवाहिक सुख का फलित
UL में स्थित और दृष्ट ग्रहों के आधार पर फलित सारणी:
| UL की स्थिति / युति ग्रह | वैवाहिक जीवन एवं जीवनसाथी का स्वरूप |
|---|---|
| बृहस्पति (Jupiter) या शुक्र (Venus) UL में | अति-शुभ व सुंदर — धार्मिक, संस्कारी, सुंदर जीवनसाथी एवं स्थायी वैवाहिक सुख। |
| शनि (Saturn) या राहु (Rahu) UL में | तनाव व विलंब — विवाह में रुकावटें, जीवनसाथी कड़वा बोलने वाला या मतभेद। |
| UL से 2रा भाव शुभ ग्रहों से युक्त | विवाह आजीवन अटूट रहेगा, कुटुंब का पूर्ण सहयोग मिलेगा। |
| UL से 2रा भाव सूर्य/मंगल/सूर्य द्वारा पीड़ित | पति/पत्नी से विच्छेद या अल्पायु योग। इसके निवारण हेतु उपपद व्रत अनिवार्य है। |