प्रिय शिष्य! पराशरी ज्योतिष में ग्रह दृष्टि (जैसे 7वीं दृष्टि, गुरु की 5-9 दृष्टि) होती है, किंतु महर्षि जैमिनी ने राशि दृष्टि (Rashi Drishti) का प्रतिपादन किया। जैमिनी सिद्धांत में राशियां आपस में एक-दूसरे को देखती हैं! यदि कोई ग्रह किसी राशि में बैठा है, तो वह उस राशि की दृष्टि के साथ अपने आप दूसरी राशियों पर प्रभाव डालता है।
इसके साथ ही जैमिनी का अर्गला सिद्धान्त (Argala Principle) यह बताता है कि 2रे, 4थे, 11वें और 5वें भाव में स्थित ग्रह किस प्रकार किसी भाव के फलों पर प्रत्यक्ष हस्तक्षेप (Interference) करते हैं। आइए, राशि दृष्टि और अर्गला का गणित सीखें!
🌀 1. जैमिनी राशि दृष्टि नियम (Rashi Drishti Rules)
12 राशियों को तीन समूहों (चर, स्थिर, द्विस्वभाव) में बांटकर दृष्टि नियम निर्धारित हैं:
| राशि का प्रकार (Rashi Type) | राशियां (Signs) | दृष्टि का नियम (Aspecting Signs) |
|---|---|---|
| चर राशियां (Movable Signs) | मेष (1), कर्क (4), तुला (7), मकर (10) | सम्मुख स्थिर राशियां (सिवाय समीप वाली के)। जैसे मेष 1 देखता है: वृश्चिक (8), सिंह (5), कुंभ (11) को (वृषभ 2 को छोड़कर)। |
| स्थिर राशियां (Fixed Signs) | वृषभ (2), सिंह (5), वृश्चिक (8), कुंभ (11) | सम्मुख चर राशियां (सिवाय पास वाली के)। जैसे वृषभ 2 देखता है: तुला (7), मकर (10), कर्क (4) को। |
| द्विस्वभाव राशियां (Dual Signs) | मिथुन (3), कन्या (6), धनु (9), मीन (12) | अन्य 3 द्विस्वभाव राशियां। जैसे मिथुन 3 देखता है: कन्या (6), धनु (9) एवं मीन (12) को। |
🔐 2. अर्गला एवं प्रति-अर्गला सिद्धान्त (Argala & Virodhargala)
अर्गला का शाब्दिक अर्थ है 'कुंडी' या 'हस्तक्षेप'। जब किसी भाव से निश्चित खानों में ग्रह बैठते हैं, तो वे उस भाव पर अर्गला (प्रभाव) डालते हैं:
1. मुख्य अर्गला (Primary Argala): किसी भी भाव से 2रा, 4था और 11वां भाव उस भाव पर प्राथमिक अर्गला डालते हैं।
2. प्रति-अर्गला (Virodhargala): 2रे भाव की अर्गला को 12वां भाव काटता है; 4थे की अर्गला को 10वां भाव काटता है; 11वें की अर्गला को 3रा भाव काटता है।
3. द्वितीयक अर्गला (Secondary Argala): 5वां भाव द्वितीयक अर्गला डालता है, जिसे 9वां भाव काटता है।