प्रिय शिष्य! अनेक बार जातक के पास जन्म समय (Birth Time) नहीं होता, या उसकी जन्म कुण्डली संदिग्ध होती है। ऐसे समय में प्रो. कृष्णमूर्ति जी द्वारा विकसित केपी हॉररी / प्रश्न शास्त्र (KP Horary Astrology) संजीवनी की तरह कार्य करता है।
केपी प्रश्न शास्त्र में प्रश्नकर्ता को 1 से 249 के बीच कोई एक संख्या मन में विचार करके बोलने को कहा जाता है। वह संख्या सीधे 249 सब-लॉर्ड्स में से एक विशिष्ट लग्न सब-लॉर्ड (Lagna CSL) को निर्धारित कर देती है। उस लग्न की कस्पल कुण्डली बनाकर प्रश्नकर्ता की इच्छा पूर्ति का सटीक निर्णय मिनटों में दिया जा सकता है। आइए, इस जादुई विद्या की क्रियाविधि समझें!
🔢 1. 1 से 249 अंक चयन एवं प्रश्न कुण्डली निर्माण विधि
केपी प्रश्न शास्त्र के संचालन हेतु निम्नलिखित नियमों का सख्ती से पालन करें:
- 1. जातक की गंभीर उत्सुकता (Genuine Desire): प्रश्नकर्ता के मन में तीव्र जिज्ञासा होनी चाहिए। केवल परीक्षा लेने या आकस्मिक मनोरंजन के लिए पूछा गया प्रश्न निष्फल होता है।
- 2. 1 से 249 संख्या का चयन: प्रश्नकर्ता से कहें, "1 से 249 के बीच कोई एक अंक बोलिए।" मान लीजिए उसने "105" बोला।
- 3. लग्न निर्धारण (Lagna Fixation): 249 सब-लॉर्ड तालिका में 105वीं प्रविष्टि (Entry) जिस राशि, नक्षत्र और सब-लॉर्ड में आती है, वही प्रश्न कुण्डली का लग्न (1st Cusp) बन जाता है।
- 4. भावों का निर्माण: उस लग्न के आधार पर प्लैसिडस सिस्टम से 12 भावों की कस्पल कुण्डली तैयार की जाती है और ग्रहों के तात्कालिक स्थान रखे जाते हैं।
🔮 2. कार्य सिद्धि का स्वर्ण नियम (Rules for Success of Query)
प्रश्न कुण्डली बनने के पश्चात् निर्णय हेतु कस्पल सब-लॉर्ड्स की जांच की जाती है:
1. प्रश्न का मुख्य भाव (Primary House of Query): जिस विषय का प्रश्न हो, उस भाव के कस्पल सब-लॉर्ड (CSL) को देखें।
- नौकरी प्रश्न: 6ठे/10वें भाव का CSL देखें।
- विवाह प्रश्न: 7वें भाव का CSL देखें।
- गुमशुदा वस्तु/व्यक्ति: 2रे/7वें भाव का CSL देखें।
2. इच्छा पूर्ति (11th House Link): यदि मुख्य भाव का CSL अपने नक्षत्र स्वामी के द्वारा 11वें भाव (इच्छा पूर्ति) को सूचित करता है, तो कार्य 100% सिद्ध होगा!