✨ सर्वतोभद्र वैदिक मुहूर्त प्रणाली
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विवाह, गृह प्रवेश, नवीन वाहन क्रय, व्यापार प्रतिष्ठा व नामकरण हेतु सर्वशुद्ध तिथि, नक्षत्र, अमृत चौघड़िया व स्थिर लग्न का शास्त्रीय अन्वेषण।
विवाह संस्कार मुहूर्त चयन
पाणिग्रहण, सप्तपदी एवं वैवाहिक मंगल कार्य हेतु सर्वशुद्ध लग्न व नक्षत्र की गणना।
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सर्वतोभद्र वैदिक मुहूर्त प्रणाली • पंचांग व चौघड़िया निर्णय
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📖 शास्त्रोक्त मुहूर्त निर्णय एवं वर्जित काल (वैदिक नियम)
🚫 भद्रा (विष्टि करण) त्याग:
भद्रा काल में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, यात्रा एवं व्यापार प्रारंभ वर्जित है। भद्रा का मुख पाताल या स्वर्ग में होने पर ही विशेष अनुष्ठान किए जा सकते हैं।
⏳ राहुकाल परिहार:
प्रत्येक दिन का 1.5 घंटा राहु के आधिपत्य में होता है। किसी भी शुभ कार्य के प्रारंभ में राहुकाल का सर्वथा त्याग करना चाहिए।
✨ स्थिर लग्न की महिमा:
गृह प्रवेश, व्यापार स्थापना और विवाह में वृषभ, सिंह, वृश्चिक व कुंभ जैसे स्थिर लग्नों का चयन कार्य में चिरकाल तक स्थायित्व एवं समृद्धि प्रदान करता है।